Sunday, 25 August 2019

‘मन की बात’ (तीसरी कड़ी) प्रसारण तिथि : 25.08.2019


‘मन की बात’ (तीसरी कड़ी)
प्रसारण तिथि : 25.08.2019

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | हमारा देश, इन दिनों एक तरफ वर्षा का आनंद ले रहा है, तो दूसरी तरफ, हिंदुस्तान के हर कोने में किसी ना किसी प्रकार से, उत्सव और मेले, दीवाली तक, सब-कुछ यही चलता है और शायद हमारे पूर्वजों ने, ऋतु चक्र, अर्थ चक्र और समाज जीवन की व्यवस्था को बखूबी इस प्रकार से ढाला है कि किसी भी परिस्थिति में, समाज में, कभी भी lullness  ना आये | पिछले दिनों हम लोगों ने कई उत्सव मनाये | कल, हिन्दुस्तान भर में श्री कृष्ण जन्म-महोत्सव मनाया गया | कोई कल्पना कर सकता है कि कैसा व्यक्तित्व होगा, कि, आज हजारों साल के बाद भी, हर उत्सव, नयापन लेकर के आता है, नयी प्रेरणा लेकर के आता है, नयी ऊर्जा लेकर के आता है और हजारों साल पुराना जीवन ऐसा, कि जो आज भी समस्याओं के समाधान के लिए, उदाहरण दे सकता हो, प्रेरणा दे सकता हो, हर कोई व्यक्ति, श्री कृष्ण के जीवन में से, वर्तमान की समस्याओं का समाधान ढूंढ सकता है | इतना सामर्थ्य होने बावजूद भी कभी वो रास में रम जाते थे, तो कभी, गायों के बीच तो कभी ग्वालों के बीच, कभी खेल-कूद करना, तो कभी बांसुरी बजाना, ना जाने विविधताओं से भरा ये व्यक्तित्व, अप्रतिम सामर्थ्य का धनी, लेकिन, समाज-शक्ति को समर्पित, लोक-शक्ति को समर्पित, लोक-संग्राहक के रूप में, नये कीर्तिमान को स्थापित करने वाला व्यक्तित्व | मित्रता कैसी हो, तो, सुदामा वाली घटना कौन भूल सकता है और युद्ध भूमि में, इतनी सारी महानताओं के बावजूद भी, सारथी का काम स्वीकार कर लेना | कभी चट्टान उठाने का, कभी, भोजन के पत्तल उठाने का काम, यानी हर चीज में एक नयापन सा महसूस होता है और इसलिए, आज जब, मैं, आपसे बात कर रहा हूँ, तो, मैं, दो मोहन की तरफ, मेरा ध्यान जाता है | एक सुदर्शन चक्रधारी मोहन, तो दूसरे चरखाधारी मोहन | सुदर्शन  चक्रधारी मोहन यमुना के तट को छोड़कर के, गुजरात में समुन्द्र के तट पर जा करके, द्वारिका की नगरी में स्थिर हुए और समुन्द्र के तट पर पैदा हुए मोहन, यमुना के तट पर आकर के, दिल्ली में, जीवन के, आखिरी सांस लेते हैं | सुदर्शन चक्रधारी मोहन ने उस समय की स्थितियों में, हजारों साल पहले भी, युद्ध को टालने के लिए, संघर्ष को टालने के लिए, अपनी बुद्धि का, अपने कर्तव्य का, अपने सामर्थ्य का, अपने चिंतन का भरसक उपयोग किया था और चरखाधारी मोहन ने भी तो एक ऐसा रास्ता चुना, स्वतंत्रता के लिए, मानवीय मूल्यों के जतन के लिए, व्यक्तित्व के मूल तत्वों को सामर्थ्य दे - इसके लिए आजादी के जंग को एक ऐसा रूप दिया, ऐसा मोड़ दिया जो पूरे विश्व के लिए अजूबा है, आज भी अजूबा है | निस्वार्थ सेवा का महत्व हो, ज्ञान का महत्व हो या फिर जीवन में तमाम उतार-चढ़ाव के बीच मुस्कुराते हुए आगे बढ़ने का महत्व हो, ये हम, भगवान कृष्ण के सन्देश से सीख सकते हैं और इसीलिये तो श्रीकृष्ण, जगतगुरु के रूप में भी जाने गए हैं – “कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम” |
आज जब हम, उत्सवों की चर्चा कर रहे हैं, तब, भारत एक और बड़े उत्सव की तैयारी में जुटा है और भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में भी उसकी चर्चा है | मेरे प्यारे देशवासियो, मैं बात कर रहा हूँ  महात्मा गाँधी की 150वीं जयन्ती | 2 अक्टूबर, 1869, पोरबन्दर, समुद्र के तट पर, जिसे आज हम कीर्ति मंदिर कहते हैं, उस छोटे से घर में एक व्यक्ति नहीं, एक युग का जन्म हुआ था, जिसने, मानव इतिहास को नया मोड़ दिया, नये कीर्तिमान स्थापित करवा दिए | महात्मा गाँधी से एक बात हमेशा जुड़ी रही, एक प्रकार से उनके जीवन का वो हिस्सा बनी रही और वह थी - सेवा, सेवा-भाव, सेवा के प्रति कर्तव्य-परायणता  | उनका पूरा जीवन देखें, तो, South Africa में उन समुदायों के लोगों की सेवा की जो नस्लीय भेद-भाव का सामना कर रहे थे | उस युग में, वो बात छोटी नहीं थी जी | उन्होंने उन किसानों की सेवा की जिनके साथ चम्पारण में भेद-भाव किया जा रहा था, उन्होंने उन मिल मजदूरों की सेवा की जिन्हें उचित मजदूरी नहीं दी जा रही थी, उन्होंने, ग़रीब, बेसहारा, कमजोर और भूखे लोगों की सेवा को, अपने जीवन का परम कर्तव्य माना | रक्त-पित्त के सम्बन्ध में कितनी भ्रमणाएँ थी, उन भ्रमणाओं को नष्ट करने के लिये स्वयं रक्त-पित्त से ग्रस्त लोगों की सेवा ख़ुद करते थे और स्वयं के, जीवन में, सेवा के माध्यम से, उदाहरण प्रस्तुत करते थे | सेवा, उन्होंने शब्दों में नहीं - जी करके सिखायी थी | सत्य के साथ, गांधी का जितना अटूट नाता रहा है, सेवा के साथ भी गाँधी का उतना ही अनन्य अटूट नाता रहा है | जिस किसी को, जब भी, जहाँ भी जरुरत पड़ी, महात्मा गाँधी सेवा के लिए हमेशा उपस्थित रहे | उन्होंने ना केवल सेवा पर बल दिया बल्कि उसके साथ जुड़े आत्म-सुख पर भी जोर दिया | सेवा शब्द की सार्थकता इसी अर्थ में है कि उसे आनंद के साथ किया जाए - सेवा परमो धर्मः | लेकिन, साथ-साथ उत्कृष्ट आनंद, ‘स्वान्त: सुखायः’ इस भाव की अनुभूति भी’ सेवा में, अन्तर्निहित है | ये, बापू के जीवन से हम भली-भांति समझ सकते हैं | महात्मा गाँधी, अनगिनत भारतीयों की तो आवाज बने ही, लेकिन, मानव मूल्य और मानव गरिमा के लिए, एक प्रकार से, वे, विश्व की आवाज बन गये थे | महात्मा गाँधी के लिए,  व्यक्ति और समाज, मानव और मानवता, यही सब कुछ था | चाहे, अफ्रीका में Phoenix Farm हो, या Tolstoy Farm, साबरमती आश्रम हो या वर्धा (Wardha ), सब स्थानों पर, अपने एक अनोखे अंदाज में, समाज संवर्धन community mobilisation पर उनका हमेशा बल रहा | ये मेरा बहुत ही सौभाग्य रहा है, कि, मुझे, पूज्य महात्मा गाँधी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जगहों पर जाकर के नमन करने का अवसर मिला है | मैं कह सकता हूँ कि गाँधी, सेवा-भाव से संगठन-भाव को भी बल देते रहते थे | समाज-सेवा और समाज-संवर्धन community service और community mobilisation यह वो भावना जिसे हमें अपने व्यवाहारिक जीवन में लाना है | सही अर्थों में, यही महात्मा गाँधी को सच्ची श्रद्धांजलि है, सच्ची कार्यांजलि है | इस प्रकार के अवसर तो बहुत आते हैं, हम जुड़ते भी हैं, लेकिन क्या गाँधी 150 ? ऐसे ही आकर के चला जाये, हमें मंजूर है क्या ? जी नहीं देशवासियो | हम सब, अपने आप से पूछें, चिंतन करें, मंथन करें, सामूहिक रूप से बातचीत करें | हम समाज के और लोगों के साथ मिलकर के, सभी वर्गों के साथ मिलकर के, सभी आयु के लोगों के साथ मिलकर के – गाँव हो, शहर हो, पुरुष हो, स्त्री हो, सब के साथ मिलकर के, समाज के लिये, क्या करें – एक व्यक्ति के नाते, मैं उन प्रयासों में क्या जोडूं | मेरी तरफ से value addition क्या हो? और सामूहिकता की अपनी एक ताकत होती है | इस पूरे, गाँधी 150, के कार्यक्रमों में, सामूहिकता भी हो, और सेवा भी हो | क्यों ना हम मिलकर के पूरा मोहल्ला निकल पड़े | अगर हमारी फुटबाल की टीम है, तो फ़ुटबाल की टीम, फ़ुटबाल तो खेलेंगे ही लेकिन एक-आध गाँधी के आदर्शों के अनुरूप सेवा का काम भी करेंगे | हमारी ladies club है | आधुनिक युग के ladies club के जो काम होते हैं वो करते रहेंगे, लेकिन, ladies club की सभी सखियाँ मिलकर के कोई ना कोई एक सेवा कार्य साथ मिलकर के करेंगे | बहुत कुछ कर सकते हैं | किताबें इकट्ठी करें पुरानी, ग़रीबों को बांटें, ज्ञान का प्रसार करें, और मैं मानता हूँ शायद 130 करोड़ देशवासियों के पास, 130 करोड़ कल्पनायें हैं, 130 करोड़ उपक्रम हो सकते हैं | कोई सीमा नहीं है – जो मन में आये - बस सदइच्छा हो, सदहेतु हो, सदभाव हो और पूर्ण समर्पण भाव की सेवा हो और वो भी स्वांत:  सुखाय: - एक अनन्य आनंद की अनुभूति के लिये हो |


    मेरे प्यारे देशवासियो, कुछ महीने पहले, मैं, गुजरात में दांडी गया था | आजादी के आंदोलन में ‘नमक सत्याग्रह’, दांडी, एक बहुत ही बड़ा महत्वपूर्ण turning point है | दांडी में, मैंने, महात्मा गाँधी को समर्पित अति-आधुनिक एक museum का उद्घाटन किया था | मेरा, आपसे जरूर आग्रह है, कि, आप भी, आने वाले समय में महात्मा गाँधी से जुड़ी कोई–न–कोई एक जगह की यात्रा जरूर करें | यह, कोई भी स्थान हो सकता है – जैसे पोरबंदर हो, साबरमती आश्रम हो, चंपारण हो, वर्धा का आश्रम हो और दिल्ली में महात्मा गाँधी से जुड़े हुए स्थान हो, आप जब, ऐसी जगहों पर जाएँ, तो, अपनी तस्वीरों को social media पर साझा जरुर करें, ताकि, अन्य लोग भी उससे प्रेरित हों और उसके साथ अपनी भावनाओं को व्यक्त करने वाले दो-चार वाक्य भी लिखिए | आपके मन के भीतर से उठे हुए भाव, किसी भी बड़ी साहित्य रचना से, ज्यादा ताक़तवर होंगे और हो सकता है, आज के समय में, आपकी नज़र में, आपकी कलम से लिखे हुए गाँधी का रूप, शायद ये अधिक relevant भी लगे | आने वाले समय में बहुत सारे कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं, प्रदर्शनियों की योजना भी बनाई गई है | लेकिन इस संदर्भ में एक बात बहुत रोचक है जो मैं आपसे साझा करना चाहता हूँ | Venice Biennale नाम का एक बहुत प्रसिद्ध art show है | जहाँ दुनिया भर के कलाकार जुटते है | इस बार Venice Biennale के India Pavilion में गाँधी जी की यादों से जुड़ी बहुत ही interesting प्रदर्शनी लगाई गई | इसमें हरिपुरा Panels विशेष रूप से दिलचस्प थे | आपको याद होगा कि गुजरात के हरीपुरा में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था जहाँ पर सुभाष चन्द्र बोस के president elect होने की घटना इतिहास में दर्ज है | इन art panels का एक बहुत ही खूबसूरत अतीत है | कांग्रेस के हरिपुरा session से पहले 1937-38 में महात्मा गाँधी ने शांति निकेतन कला भवन के तत्कालीन Principal नन्द लाल बोस को आमन्त्रित किया था | गाँधी जी चाहते थे कि वे भारत में रहने वाले लोगों की जीवनशैली को कला के माध्यम से दिखाए और उनकी इस art work का प्रदर्शन अधिवेशन के दौरान हो | ये वही नन्द लाल बोस है जिनका art work हमारे संविधान की शोभा बढ़ाता है | संविधान को एक नई पहचान देता है | और उनकी इस कला साधना ने संविधान के साथ-साथ नन्द लाल बोस को भी अमर बना दिया है | नन्द लाल बोस ने हरिपुरा के आस-पास के गाँव का दौरा किया और अंत में ग्रामीण भारत के जीवन को दर्शाते हुए कुछ art canvas बनाये | इस अनमोल कलाकारी की Venice में जबरदस्त चर्चा हुई | एक बार फिर गाँधी जी की 150वीं जन्म जयंती पर शुभकामनाओं के साथ, हर हिन्दुस्तानी से कोई न कोई संकल्प की, मैं अपेक्षा करता हूँ | देश के लिए, समाज के लिए, किसी और के लिए कुछ न कुछ करना चाहिए | यही बापू को अच्छी, सच्ची, प्रमाणिक कार्यांजलि होगी |
    माँ भारती के सपूतों, आपको याद होगा कि पिछले कुछ सालों में हम 2 अक्टूबर से पहले लगभग 2 सप्ताह तक देशभर में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान चलाते है | इस बार ये 11 सितम्बर से शुरू होगा | इस दौरान हम अपने-अपने घरों से बाहर निकल कर श्रमदान के ज़रिये महात्मा गाँधी को कार्यांजलि देंगे |  घर हो या गलियाँ, चौक-चौराहे हो या नालियाँ, स्कूल, कॉलेज से लेकर सभी सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता का महा अभियान चलाना है | इस बार प्लास्टिक पर विशेष जोर देना है 15 अगस्त को लाल किले से मैंने ये कहा कि जिस उत्साह व ऊर्जा के साथ सवा-सौ करोड़ देशवासियों ने स्वच्छता के लिए अभियान चलाया | खुले में शौच से मुक्ति के लिए कार्य किया | उसी प्रकार हमें साथ मिलकर Single use plastic के इस्तमाल को खत्म करना है | इस मुहीम को लेकर समाज के सभी वर्गों में उत्साह है | मेरे कई व्यापारी भाइयों-बहनों ने दुकान में एक तख्ती लगा दी है, एक placard लगा दिया है | जिस पर यह लिखा है कि ग्राहक अपना थैला साथ ले करके ही आये | इससे पैसा भी बचेगा और पर्यावरण की रक्षा में वे अपना योगदान भी दे पायेंगे | इस बार 2 अक्टूबर को जब बापू की 150वीं जयंती मनायेंगे तो इस अवसर पर हम उन्हें न केवल खुले में शौच से मुक्त भारत समर्पित करेंगे बल्कि उस दिन पूरे देश में प्लास्टिक के खिलाफ एक नए जन-आंदोलन की नींव रखेंगे | मैं समाज के सभी वर्गों से, हर गाँव, कस्बे में और शहर के निवासियों से अपील करता हूँ, करबद्ध प्रार्थना करता हूँ कि इस वर्ष गाँधी जयंती, एक प्रकार से हमारी इस भारत माता को प्लास्टिक कचरे से मुक्ति के रूप में हम मनाये | 2 अक्टूबर विशेष दिवस के रूप में मनायें | महात्मा गाँधी जयंती का दिन एक विशेष श्रमदान का उत्सव बन जाए | देश की सभी नगरपालिका, नगरनिगम, जिला-प्रशासन, ग्राम-पंचायत, सरकारी-गैरसरकारी सभी व्यवस्थाएँ, सभी संगठन, एक-एक नागरिक हर किसी से मेरा अनुरोध है कि प्लास्टिक कचरे के collection और storage के लिए उचित व्यवस्था हो | मैं corporate sector से भी अपील करता हूँ कि जब ये सारा plastic waste इकठ्ठा हो जाए तो इसके उचित निस्तारण हेतु आगे आयें, disposal की व्यवस्था हो | इसे recycle किया जा सकता है | इसे ईंधन बनाया जा सकता है | इस प्रकार इस दिवाली तक हम इस प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित निपटारे का भी कार्य पूरा कर सकते है | बस संकल्प चाहिए | प्रेरणा के लिए इधर-उधर देखने की जरुरत नहीं है गाँधी से बड़ी प्रेरणा क्या हो सकती है |     
मेरे प्यारे देशवासियों, हमारे संस्कृत सुभाषित एक प्रकार से ज्ञान के रत्न होते हैं | हमें जीवन में जो चाहिए वो उसमे से मिल सकता है | इन दिनों तो मेरा संपर्क बहुत कम हो गया है लेकिन पहले मेरा संपर्क बहुत था | आज मैं एक संस्कृत सुभाषित से एक बहुत महत्वपूर्ण बात को स्पर्श करना चाहता हूँ और ये सदियों पहले लिखी गई बातें हैं, लेकिन आज भी, इसका कितना महत्व है | एक उत्तम सुभाषित है और उस सुभाषित ने कहा है –
“ पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि  जलमन्नं सुभाषितम् |
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा प्रदीयते” ||
यानि कि पृथ्वी में जल, अन्न और सुभाषित – यह तीन रत्न है | मूर्ख लोग पत्थर को रत्न कहते हैं | हमारी संस्कृति में अन्न की बहुत अधिक महिमा रही है | यहाँ तक कि हमने अन्न के ज्ञान को भी विज्ञान में बदल दिया है | संतुलित और पोषक भोजन हम सभी के लिए जरुरी है | विशेष रूप से महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए, क्योंकि, ये ही हमारे समाज के भविष्य की नींव है | ‘पोषण अभियान’ के अंतर्गत पूरे देशभर में आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से पोषण को जन-आन्दोलन बनाया जा रहा है | लोग नए और दिलचस्प तरीकों से कुपोषण से लड़ाई लड़ रहे हैं | कभी मेरे ध्यान में एक बात लाई गई थी | नाशिक के अन्दर ‘मुट्ठी भर धान्य’ एक बड़ा आन्दोलन हो गया है | इसमें फसल कटाई के दिनों में आंगनवाड़ी सेविकाएँ लोगों से एक मुट्ठी अनाज इकठ्ठा करती हैं | इस अनाज का उपयोग, बच्चों और महिलाओं के लिए गर्म भोजन बनाने में किया जाता है | इसमें दान करने वाला व्यक्ति एक प्रकार से जागरुक नागरिक समाज सेवक बन जाता है | इसके बाद वो इस ध्येय के लिए खुद भी समर्पित हो जाता है | उस आन्दोलन का वो एक सिपाही बन जाता है | हम सभी ने परिवारों में हिंदुस्तान के हर कोने में अन्न प्राशन संस्कार के बारे में सुना है | ये संस्कार तब किया जाता है जब बच्चे को पहली बार ठोस आहार खिलाना शुरू करते हैं | Liquid food नही Solid food  | गुजरात ने 2010 में सोचा कि क्यूँ न ‘अन्न प्राशन संस्कार’ के अवसर पर बच्चों को complimentary food दिया जाये ताकि लोगों को, इसके बारे में जागरुक किया जा सके | यह एक बहुत ही शानदार पहल है जिसे, हर कहीं, अपनाया जा सकता है | कई राज्यों में लोग तिथि भोजन अभियान चलाते हैं | अगर परिवार में जन्मदिन हो, कोई शुभदिन हो, कोई स्मृति दिवस हो, तो परिवार के लोग, पौष्टिक खाना, स्वादिष्ट खाना बनाकर के आंगनवाड़ी में जाते हैं, स्कूलों में जाते हैं और परिवार के लोग खुद बच्चों को परोसते हैं, खिलाते हैं | अपने आनंद को भी बाँटते हैं और आनंद में इज़ाफा करते हैं | सेवाभाव और आनंदभाव का अद्भुत मिलन नज़र आता है | साथियों, ऐसी कई सारी छोटी-छोटी चीजें हैं जिससे हमारा देश कुपोषण के खिलाफ़ एक प्रभावी लड़ाई लड़ सकते हैं | आज, जागरूकता के आभाव में, कुपोषण से ग़रीब भी, और संपन्न भी, दोनों ही तरह के परिवार प्रभावित हैं | पूरे देश में सितम्बर महीना ‘पोषण अभियान’ के रूप में मनाया जाएगा | आप जरुर इससे जुड़िये, जानकारी लीजिये, कुछ नया जोड़ियें | आप भी योगदान दीजिये | अगर आप एकाध व्यक्ति को भी कुपोषण से बाहर लाते हैं मतलब हम देश को कुपोषण से बाहर लाते हैं |
हेलो सर, मेरा नाम सृष्टि विद्या है और मैं 2nd year की student हूँ | सर मैंने twelve august को आपका episode देखा था Bear Grylls के साथ, जिसमें आप आये थे | तो सर मुझे वो आपका episode देखकर बहुत अच्छा लगा | First of all तो ये सुनकर अच्छा लगा कि आपको हमारे nature, wild life and environment की कितनी ज्यादा फ़िक्र है, कितनी ज्यादा care है और सर मुझे बहुत अच्छा लगा आपको इस नये रूप में, एक adventurous रूप में देख के | तो सर, मैं जानना चाहूंगी कि आपको इस episode के दौरान experience कैसा रहा और sir last में एक बात और add करना चाहूंगी कि आपका fitness level देख कर हम जैसे youngster बहुत ज्यादा impress और बहुत ज्यादा  motivate हुए हैं आपको इतना fit and fine देखकर  |          
सृष्टि जी आपके फ़ोन कॉल के लिए धन्यवाद् | आपकी ही तरह हरियाणा में, सोहना से, के.के.पाण्डेय जी और सूरत की ऐश्वर्या शर्मा जी के साथ, कई लोगों ने Discovery Channel पर दिखाये गये  ‘Man vs. Wild’ episode के बारे में जानना चाहा है | इस बार जब ‘मन की बात’ के लिए मैं सोच रहा था तो मुझे पक्का भरोसा था कि इस विषय में बहुत सारे सवाल आयेंगे और हुआ भी ऐसा ही और पिछले कुछ हफ़्तों में मैं जहाँ भी गया लोगों से मिला हूँ वहाँ ‘Man vs. Wild’ का भी ज़िक्र आ ही जाता है | इस एक episode से मैं न सिर्फ हिंदुस्तान दुनिया भर के युवाओं से जुड़ गया हूँ | मैंने भी कभी सोचा नही था कि युवा दिलों में इस प्रकार से मेरी जगह बन जायेगी | मैंने भी कभी सोचा नही था कि हमारे देश के और दुनिया के युवा कितनी विविधता भरी चीजों की तरफ ध्यान देते हैं | मैंने भी कभी सोचा नही था कि कभी दुनिया भर के युवा के दिल को छूने का मेरी ज़िन्दगी में अवसर आयेगा | और होता क्या है ? अभी पिछले सप्ताह मैं भूटान गया था | मैंने देखा है कि प्रधानमंत्री के रूप में मुझे जब से जहाँ भी जाने का अवसर मिला और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कारण से स्थिति ये बन गई है कि दुनिया में जिस किसी के पास जाता हूँ बैठता हूँ तो कोई - न - कोई पाँच-सात मिनट तो योग के संबंध में मेरे से सवाल-जवाब करते ही करते हैं | शायद ही दुनिया का कोई बड़ा ऐसा नेता होगा जिसने मेरे से योग के संबंध में चर्चा न की हो और ये सारी दुनिया में मेरा अनुभव आया है | लेकिन इन दिनों एक नया अनुभव आ रहा है | जो भी मिलता है, जहाँ भी बात करने का मौका मिलता है | वे Wildlife के विषय में चर्चा करता है, Environment  के सम्बन्ध में चर्चा करता है | Tiger, Lion, जीव-सृष्टि और मैं हैरान हूँ कि लोगों की कितनी रूचि होती है | Discovery ने इस कार्यक्रम को 165 देशों में उनकी भाषा में प्रसारित करने की योजना बनाई है | आज जब पर्यावरण, Global Warming, Climate Change एक वैश्विक मंथन का दौर चल रहा है | मुझे आशा है कि ऐसे में यह कार्यक्रम भारत का सन्देश, भारत की परंपरा, भारत के संस्कार यात्रा में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, इन सारी बातों से विश्व को परिचित कराने में ये Discovery Channel  का ये episode बहुत मदद करेगा ऐसा मेरा पक्का विश्वास बन गया है और हमारे भारत में climate justice और clean environment की दिशा में उठाये गए कदमों को अब लोग जानना चाहते हैं | लेकिन एक और interesting बात है कुछ लोग संकोच के साथ भी मुझे एक बात जरुर पूछते हैं कि मोदी जी बताइये आप हिन्दी बोल रहे थे और Bear Grylls हिंदी जानते नहीं हैं तो इतना तेजी से आपके बीच सवांद कैसे होता था ? ये क्या बाद में edit किया हुआ है ? ये इतना बार-बार shooting हुआ है ? क्या हुआ है ? बड़ी जिज्ञासा के साथ पूछते हैं | देखिये, इसमें कोई रहस्य नहीं है | कई लोगों के मन में ये सवाल है, तो मैं इस रहस्य को खोल ही देता हूँ | वैसे वो रहस्य है ही नहीं | Reality तो यह है कि Bear Grylls के साथ बातचीत में technology का भरपूर इस्तेमाल किया गया | जब मैं कुछ भी बोलता था तो तुरंत ही अंग्रेजी में simultaneous अनुवाद होता था | simultaneous interpretation होता था और Bear Grylls के कान में एक cordless छोटा सा instrument लगा हुआ था | तो मैं बोलता था हिंदी लेकिन उसको सुनाई देता था अंग्रेजी और उसके कारण संवाद बहुत आसान हो जाता था और technology का यही तो कमाल है | इस show के बाद बड़ी संख्या में लोग मुझे जिम कॉर्बेट, नेशनल पार्क के विषय में चर्चा करते नजर आए हैं | आप लोग भी nature और wild life प्रकृति और जन्य-जीवों से जुड़े स्थलों पर जरुर जाएं | मैंने पहले भी कहा है, मैं जरुर कहता हूँ आपको | अपने जीवन में north-east जरुर जाइये | क्या प्रकृति है वहाँ | आप देखते ही रह जायेंगें | आपके भीतर का विस्तार हो जाएगा | 15 अगस्त को लाल किले से मैंने आप सभी से आग्रह किया था कि अगले 3 वर्ष में, कम-से-कम 15 स्थान और भारत के अन्दर 15 स्थान और पूरी तरह 100% tourism के लिए ही ऐसे 15 स्थान पर जाएं, देखें, अध्य्यन करें, परिवार को लेकर जाएं, कुछ समय वहाँ बिताएं | विविधिताओं से भरा हुआ देश आपको भी ये विविधिताएं एक शिक्षक के रूप में, आपको भी, भीतर से विविधिताओं से भर देंगे | आपका अपने जीवन का विस्तार होगा | आपके चिंतन का विस्तार होगा | और मुझपे भरोसा कीजिए हिंदुस्तान के भीतर ही ऐसे स्थान हैं जहाँ से आप नई स्फूर्ति, नया उत्साह, नया उमंग, नई प्रेरणा ले करके आएंगें और हो सकता है कुछ स्थानों पर तो बार-बार जाने का मन आपको भी होगा, आपके परिवार को भी होगा |
मेरे प्यारे देशवासियो, भारत में पर्यावरण की care और concern यानि देखभाल की चिंता स्वाभाविक नजर आ रही है | पिछले महीने मुझे देश में tiger census जारी करने का सौभाग्य मिला था | क्या आप जानते हैं कि भारत में कितने बाघ हैं ? भारत में बाघों की आबादी 2967 है | Two thousand nine hundred sixty seven | कुछ साल पहले इससे आधे भी बड़ी मुश्किल से थे हम | बाघों को लेकर 2010 में रूस के saint Petersburg में Tiger summit हुआ था | इसमें दुनिया में बाघों की घटती संख्या को लेकर चिंता जाहिर करते हुए एक संकल्प लिया गया था | यह संकल्प था Twenty Twenty  Two 2022 तक पूरी दुनिया में बाघों की संख्या को दोगुना करना | लेकिन यह New India है हम लक्ष्यों को जल्दी से जल्द पूरा करते हैं | हमनें 2019 में ही अपने यहाँ tiger की संख्या दोगुनी कर दी | भारत में सिर्फ बाघों की संख्या ही नहीं बल्कि protected areas और community reserves की संख्या भी बढ़ी हैं | जब मैं बाघों का data release कर रहा था तो मुझे गुजरात के गीर के शेर की भी याद आई | जब मैंने वहाँ मुख्यमंत्री का दायित्व संभाला था | तब गीर की जंगलों में शेरों का habitat सिकुड़ रहा था | उनकी संख्या कम होती जा रही थी | हमनें गीर में एक के बाद एक कई कदम उठाए | 2007 में वहाँ महिला guards को तैनात करने का फैसला लिया | पर्यटन को बढ़ाने के लिए infrastructure में सुधार किए | जब भी हम प्रकृति और वन्य-जीवों की बात करते हैं तो केवल conservation की ही बात करते हैं | लेकिन, अब हमें conservation से आगे बढ़ कर compassion को लेकर सोचना ही होगा | हमारे शास्त्रों में इस विषय में भी बहुत अच्छा मार्गदर्शन मिला है | सदियों पहले हमारे शास्त्रों में हमनें कहा है :-
निर्वनो बध्यते व्याघ्रो, निर्व्याघ्रं  छिद्यते वनम | 
तस्माद् व्याघ्रो वनं रक्षेत्, वनं व्याघ्रं न पालयेत्  ||

अर्थात, यदि वन न हों तो बाघ मनुष्य की आबादी में आने को मजबूर हो जाते हैं और मारे जाते हैं और यदि जंगल में बाघ न हों तो मनुष्य जंगल काटकर उसे नष्ट कर देता है इसलिए वास्तव में बाघ वन की रक्षा करता है, न कि, वन बाघ की - कितने उत्तम तरीके से विषय को हमारे पूर्वजों ने समझाया है | इसलिए हमें अपने वनों, वनस्पतियों और वन्य जीवों का न केवल संरक्षण करने की आवश्यकता है बल्कि ऐसा वातावरण भी बनाना होगा जिससे वे सही तरीके से फल-फूल सकें | 

मेरे प्यारे देशवासियो, 11 सितम्बर, 1893 eighteen ninety three स्वामी विवेकानंद जी का ऐतिहासिक भाषण कौन भूल सकता है | पूरे विश्व की मानव जाति को झकझोर करने वाला भारत का ये युवा सन्यासी दुनिया के अन्दर भारत की एक तेजस्वी पहचान छोड़ करके आ गया | जिस गुलाम भारत की तरफ दुनिया बड़ी विकृत भाव से देख रही थी | उस दुनिया को 11 सितम्बर, 1893 स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष के शब्दों ने दुनिया को भारत की तरफ देखने का नज़रिया बदलने के लिए मजबूर कर दिया | आइये, स्वामी विवेकानंद जी ने जिस भारत के रूप को देखा था | स्वामी विवेकानंद जी ने भारत के जिस सामर्थ्य को जाना था | हम उसे जीने की कोशिश करें | हमारे भीतर है, सबकुछ है | आत्मविश्वास के साथ चल पड़ें |
मेरे प्यारे देशवासियो, आप सभी को याद होगा कि 29 अगस्त को ‘राष्ट्र खेल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है | इस अवसर पर हम देश भर में ‘FIT INDIA MOVEMENT’ launch करने वाले हैं | खुद को fit रखना है | देश को fit बनाना है | हर एक के लिए बच्चे, बुजुर्ग, युवा, महिला सब के लिए ये बड़ा interesting अभियान होगा और ये आपका अपना होगा |  लेकिन उसकी बारीकियां आज मैं बताने नहीं जा रहा हूँ | 29 अगस्त का इंतजार कीजिये | मैं खुद उस दिन विस्तार से विषय में बताने वाला हूँ और आपको जोड़े बिना रहने वाला नहीं हूँ | क्योंकि आपको मैं fit देखना चाहता हूँ | आपको fitness के लिए जागरूक बनाना चाहता हूँ और fit India के लिए देश के लिए हम मिल करके कुछ लक्ष्य भी निर्धारित करें |
मेरे प्यारे देशवासियो, मुझे आपका इंतजार रहेगा 29 अगस्त को fit India में | सितम्बर महीने में ‘पोषण अभियान’ में | और विशेषकर 11 सितम्बर से 02 अक्टूबर ‘स्वच्छता अभियान’ में | और 02 अक्टूबर totally dedicated plastic के लिए | Plastic से मुक्ति पाने के लिए हम सब, घर, घर के बाहर सब जगह से पूरी ताकत से लगेंगे और मुझे पता है ये सारे अभियान social media में तो धूम मचा देंगे | आइये, एक नए उमंग, नए संकल्प, नई शक्ति के साथ चल पड़ें |
मेरे प्यारे देशवासियो, आज ‘मन की बात’ में इतना ही | फिर मिलेंगे | मैं आपकी बातों का, आपके सुझावों का इंतजार करूँगा | आइये, हम सब मिल करके आजादी के दीवानों के सपनों का भारत बनाने के लिए गांधी के सपनों को साकार करने के लिए चल पड़ें – ‘स्वान्त: सुखाय:’ | भीतर के आनंद को सेवा भाव से प्रकट करते हुए चल पड़ें |
बहुत-बहुत धन्यवाद |
नमस्कार |
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Sunday, 28 July 2019

‘मन की बात’ (दूसरी कड़ी)



‘मन की बात’ (दूसरी कड़ी)

प्रसारण तिथि : 28.07.2019


मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | ‘मन की बात’ हमेशा की तरह, मेरी तरफ से भी और आपकी तरफ से भी एक प्रतीक्षा रहती है | इस बार भी मैंने देखा कि बहुत सारे पत्र, comments, phone call  मिले हैं – ढ़ेर सारी कहानियां हैं, सुझाव हैं, प्रेरणा हैं हर कोई कुछ ना कुछ करना चाहता है और कहना भी चाहता है – एक जज़्बा महसूस होता है और इन सभी में बहुत कुछ है, जो मैं समेटना चाहूँगा, लेकिन, समय की सीमा है, इसलिये समेट भी नहीं पाता हूँ | ऐसा लग रहा है कि आप मेरी बहुत कसौटी कर रहे हैं | फिर भी, आप ही की बातों को, इस ‘मन की बात’ के धागे में पिरोकर के फिर से एक बार आपको बांटना चाहता हूँ |
आपको याद होगा पिछली बार मैंने प्रेमचंद जी की कहानियों की एक पुस्तक के बारे में चर्चा की थी और हमने तय किया था कि जो भी बुक पढ़ें, उसके बारे में कुछ बातें NarendraModi App के माध्यम से सबके साथ share करें | मैं देख रहा था कि बड़ी संख्या में लोगों ने अनेक प्रकार के पुस्तकों की जानकारी साझा की हैं | मुझे अच्छा लगा कि लोग science, technology, innovation, इतिहास, संस्कृति, business, जीवन चरित्र, ऐसे कई विषयों पर लिखी गयी किताबों पर और उसको लेकर चर्चा कर रहे हैं | कुछ लोगों ने तो मुझे यह भी सलाह दी है कि मैं कई और पुस्तकों के बारे में बात करूँ | ठीक है, मैं जरुर कुछ और पुस्तकों के बारे में आपसे बात करूँगा | लेकिन एक बात मुझे स्वीकारनी होगी कि अब मैं बहुत ज्यादा किताब पढ़ने में समय नहीं दे पा रहा हूँ | लेकिन एक फायदा जरुर हुआ है, कि आप लोग जो लिख करके भेजते हैं तो कई किताबों के विषय में मुझे जानने का जरुर अवसर मिल रहा है | लेकिन ये जो, पिछले एक महीने का अनुभव है, उससे मुझे लगता कि इसको  हमने आगे बढ़ाना है | क्यों ना हम NarendraModi App पर एक permanent book’s corner ही बना दें और जब भी हम नई किताब पढ़ें, उसके बारे में वहाँ लिखें, चर्चा करें और आप हमारे इस book’s corner के लिए, कोई अच्छा सा नाम भी suggest कर सकते हैं | मैं चाहता हूँ कि यह book’s corner पाठकों और लेखकों के लिए, एक सक्रिय मंच बन जाये | आप पढ़ते-लिखते रहें और ‘मन की बात’ के सारे साथियों के साथ साझा भी करते रहें |
    साथियो, ऐसा लगता है कि जल संरक्षण - ‘मन की बात’ में जब मैंने इस बात को स्पर्श किया था, लेकिन शायद आज मैं अनुभव कर रहा हूँ कि मेरे कहने से पहले भी जल संरक्षण ये आपके दिल को छूने वाला विषय था, सामान्य मानवी की पसंदीदा विषय था | और मैं  अनुभव कर रहा हूँ कि पानी के विषय में इन दिनों हिन्दुस्तान के दिलों को झकझोर दिया है | जल संरक्षण को लेकर, देशभर में अनेक विद, प्रभावी प्रयास चल रहे हैं | लोगों ने पारंपरिक तौर-तरीकों के बारे में जानकारियाँ तो share की हैं | मीडिया ने जल संरक्षण पर कई innovative campaign शुरू किये हैं | सरकार हो, NGOs हो - युद्ध स्तर पर कुछ-ना-कुछ कर रहे हैं | सामूहिकता का सामर्थ्य देखकर, मन को बहुत अच्छा लग रहा है, बहुत संतोष हो रहा है | जैसे, झारखण्ड में रांची से कुछ दूर, ओरमांझी प्रखण्ड के आरा केरम गाँव में, वहाँ के ग्रामीणों ने जल प्रबंधन को लेकर जो हौंसला दिखाया है, वो हर किसी के लिए मिसाल बन गया है | ग्रामीणों ने, श्रम दान करके पहाड़ से बहते झरने को, एक निश्चित दिशा देने का काम किया | वो भी शुद्ध देसी तरीका | इससे ना केवल मिट्टी का कटाव और फसल की बर्बादी रुकी है, बल्कि खेतों को भी पानी मिल रहा है | ग्रामीणों का ये श्रम दान, अब पूरे गाँव के लिए जीवन दान से कम नहीं है | आप सबको यह जानकर भी बहुत खुशी होगी कि North East का खूबसूरत राज्य मेघालय देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने अपनी जल-नीति, water policy तैयार की है | मैं वहाँ की सरकार को बधाई देता हूँ |
हरियाणा में, उन फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिनमें कम पानी की जरुरत होती है और किसान का भी कोई नुकसान नहीं होता है | मैं हरियाणा सरकार को विशेष रूप से बधाई देना चाहूंगा कि उन्होंने किसानों के साथ संवाद करके, उन्हें परम्परागत खेती से हटकर, कम पानी वाली फसलों के लिए प्रेरित किया |
    अब तो त्योहारों का समय आ गया है | त्योहारों के अवसर पर कई मेले भी लगते हैं | जल संरक्षण के लिए क्यों ना इस मेलों का भी उपयोग करें | मेलों में समाज के हर वर्ग के लोग पहुँचते हैं | इन मेलों में पानी बचाने का सन्देश हम बड़े ही प्रभावी ढंग से दे सकते हैं, प्रदर्शनी लगा सकते हैं, नुक्कड़ नाटक कर सकते हैं, उत्सवों के साथ-साथ जल संरक्षण का सन्देश बहुत आसानी से हम पहुँचा सकते हैं |
साथियो, जीवन में कुछ बातें हमें उत्साह से भर देती हैं और  विशेष रूप से बच्चों की उपलब्धियां, उनके कारनामे, हम सबको नई ऊर्जा देते हैं और इसलिए आज मुझे, कुछ बच्चों के बारे में, बात करने का मन करता है और ये बच्चे हैं निधि बाईपोटु, मोनीष जोशी, देवांशी रावत, तनुष जैन, हर्ष देवधरकर, अनंत तिवारी, प्रीति नाग, अथर्व देशमुख, अरोन्यतेश गांगुली और हृतिक अला-मंदा |
मैं इनके बारे में जो बताऊंगा, उससे आप भी, गर्व और जोश से भर जायेंगे | हम सब जानते हैं कि कैंसर एक ऐसा शब्द है जिससे पूरी दुनिया डरती है | ऐसा लगता है, मृत्यु द्वार पर खड़ी है, लेकिन इन सभी दस बच्चों ने, अपनी ज़िंदगी की जंग में, ना केवल कैंसर को, कैंसर जैसी घातक बीमारी को पराजित किया है बल्कि अपने कारनामे से पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है | खेलों में हम अक्सर देखते हैं कि खिलाड़ी tournament जीतने या मैडल हांसिल करने के बाद champion बनते हैं, लेकिन यह एक दुर्लभ अवसर रहा, जहाँ ये लोग, खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से पहले ही champion थे और वो भी ज़िंदगी की जंग के champion |

दरअसल, इसी महीने Moscow में World Children’s winners games का आयोजन हुआ | यह एक ऐसा अनोखा sports tournament है, जिसमें young cancer survivors यानी जो लोग अपने जीवन में कैंसर से लड़कर बाहर निकले हैं, वे ही हिस्सा लेते हैं | इस प्रतियोगिता में Shooting, Chess, Swimming, Running, Football और Table Tennis जैसी स्पर्द्धाओं का आयोजन किया गया | हमारे देश के इन सभी दस champions ने इस tournament में मैडल जीते | इनमें से कुछ खिलाड़ियों ने तो एक से ज्यादा खेलों में मैडल जीते |

मेरे प्यारे देशवासियो, मुझे पूरा विश्वास है कि आपको आसमान के भी पार, अंतरिक्ष में, भारत की सफलता के बारे में, जरुर गर्व हुआ होगा – Chandrayaan-two |
राजस्थान के जोधपुर से संजीव हरीपुरा, कोलकाता से महेंद्र कुमार डागा, तेलंगाना से पी. अरविन्द राव, ऐसे अनेक, देशभर के अलग-अलग भागों से, कई लोगों ने, मुझे NarendraModi App और MyGov पर लिखा है और उन्होंने ‘मन की बात’ में Chandrayaan-two के बारे में चर्चा करने का आग्रह किया है |
दरअसल, Space की दृष्टि से 2019 भारत के लिए बहुत अच्छा साल रहा है | हमारे वैज्ञानिकों ने, मार्च में, A-Sat launch किया था और उसके बाद Chandrayaan-two चुनाव की आपाधापी में उस समय A-Sat जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण खबर की ज्यादा चर्चा नहीं हो पाई थी | जबकि हमने A-Sat मिसाइल से, महज़ तीन मिनट में, तीन-सौ किलोमीटर दूर Satellite को मार गिराने की क्षमता हासिल की | यह उपलब्धि हासिल करने वाला भारत, दुनिया का, चौथा देश बना और अब, 22 जुलाई को पूरे देश ने, गर्व के साथ देखा, कि कैसे  Chandrayaan-two ने श्रीहरिकोटा से अंतरिक्ष की ओर अपने कदम बढ़ाए | Chandrayaan-two के प्रक्षेपण की तस्वीरों ने देशवासियों को गौरव और जोश से, प्रसन्नता से, भर दिया |
Chandrayaan-two, यह मिशन कई मायनों में विशेष है | Chandrayaan-two, चाँद के बारे में हमारी समझ को और भी स्पष्ट करेगा | इससे हमें चाँद के बारे में ज्यादा विस्तार से जानकारियाँ मिल सकेंगी लेकिन, अगर आप मुझसे पूछें कि Chandrayaan-two से मुझे कौन-सी दो बड़ी सीख मिली, तो मैं कहूँगा, ये दो सीख हैं – Faith और Fearlessness यानी विश्वास और निर्भीकता | हमें, अपने talents और capacities पर भरोसा होना चाहिए, अपनी प्रतिभा और क्षमता पर विश्वास करना चाहिए | आपको ये जानकार ख़ुशी होगी कि Chandryaan-two पूरी तरह से भारतीय रंग में ढ़ला है | यह Heart and Spirit से भारतीय है | पूरी तरह से एक स्वदेशी मिशन है | इस मिशन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब बात नए-नए क्षेत्र में कुछ नया कर गुजरने की हो, Innovative Zeal की हो, तो हमारे वैज्ञानिक सर्वश्रेष्ठ हैं, विश्व-स्तरीय हैं |
दूसरा, महत्वपूर्ण पाठ यह है कि किसी भी व्यवधान से घबराना नहीं चाहिए | जिस प्रकार हमारे वैज्ञानिकों ने, रिकॉर्ड समय में, दिन-रात एक करके सारे Technical issues को ठीक कर Chandryaan-two को launch किया, वह अपने आप में अभूतपूर्व है | वैज्ञानिकों की इस महान तपस्या को पूरी दुनिया ने देखा | इस पर हम सभी को गर्व होना चाहिए और व्यवधान के बावजूद भी पहुँचने का समय उन्होंने बदला नहीं इस बात का भी बहुतों को आश्चर्य है | हमें अपने जीवन में भी temporary set backs यानी अस्थाई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, लेकिन, हमेशा याद रखिए इससे पार पाने का सामर्थ्य भी हमारे भीतर ही होता है | मुझे पूरी उम्मीद है कि Chandryaan-two अभियान देश के युवाओं को Science और Innovation के लिए प्रेरित करेगा | आखिरकार विज्ञान ही तो विकास का मार्ग है | अब हमें, बेसब्री से सितम्बर महीने का इंतजार है जब चंद्रमा की सतह पर लैंडर – विक्रम और रोवर – प्रज्ञान की लैंडिंग होगी |
आज ‘मन की बात’ के माध्यम से, मैं, देश के विद्यार्थी दोस्तों के साथ, युवा साथियों के साथ एक बहुत ही दिलचस्प प्रतियोगिता के बारे में, competition के बारे में, जानकारी साझा करना चाहता हूँ और देश के युवक-युवतियों को निमंत्रित करता हूँ – एक Quiz Competition | अंतरिक्ष से जुड़ी जिज्ञासाएं, भारत का space mission, Science और Technology - इस Quiz Competition के मुख्य विषय होंगे, जैसे कि, rocket launch करने के लिए क्या-क्या करना पड़ता है! Satellite को कैसे Orbit में स्थापित किया जाता है! और Satellite से हम क्या-क्या जानकारियाँ प्राप्त करते हैं! A-Sat क्या होता है! बहुत सारी बातें हैं | MyGov website पर, एक अगस्त को, प्रतियोगिता की details दी जाएगी |
मैं युवा साथियों को, विद्यार्थियों को, अनुरोध करता हूँ कि इस Quiz Competition में भाग लें और अपनी हिस्सेदारी से, इसे दिलचस्प, रोचक और यादगार बनाएँ | मैं स्कूलों से, अभिभावकों से, उत्साही आचार्यों और शिक्षकों से, विशेष आग्रह करता हूँ कि वे अपने स्कूल को विजयी बनाने के लिए भरसक मेहनत करें | सभी विद्यार्थियों को इसमें जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करें और सबसे रोमांचक बात यह है, कि, हर राज्य से, सबसे ज्यादा score करने वाले विद्यार्थियों को, भारत सरकार अपने खर्च पर श्रीहरिकोटा लेकर जाएगी और सितम्बर में उन्हें उस पल का साक्षी बनने का अवसर मिलेगा जब चंद्रयान, चंद्रमा की सतह पर land कर रहा होगा | इन विजयी विद्यार्थियों के लिए उनके जीवन की ऐतिहासिक घटना होगी, लेकिन इसके लिए, आपको Quiz Competition में हिस्सा लेना होगा, सबसे ज्यादा अंक प्राप्त करने होंगे, आपको विजयी होना होगा |
साथियो, मेरा ये सुझाव आपको जरुर अच्छा लगा होगा - है ना मजेदार अवसर ! तो हम Quiz में भाग लेना न भूलें और ज्यादा-से-ज्यादा साथियों को भी प्रेरित करें |  
मेरे प्यारे देशवासियो, आपने एक बात observe करी होगी | हमारी मन की बातों ने स्वच्छता अभियान को समय समय पर गति दी है और इसी तरह से स्वच्छता के लिए किए जा रहे प्रयासों ने भी ‘मन की बात’ को हमेशा ही प्रेरणा दी है | पाँच साल पहले शुरू हुआ सफ़र आज जन-जन की सहभागिता से, स्वच्छता के नए-नए मानदंड स्थापित कर रहा है | ऐसा नहीं है कि हमने स्वच्छता में आदर्श स्थिति हासिल कर ली है, लेकिन जिस प्रकार से ODF से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक स्वच्छता अभियान में सफलता मिली है, वो एक-सौ तीस करोड़ देशवासियों के संकल्प की ताक़त है, लेकिन हम, इतने पर रुकने वाले नहीं हैं | ये आंदोलन अब स्वच्छता से सुन्दरता की ओर बढ़ चला है | अभी कुछ दिन पहले ही मैं media में श्रीमान् योगेश सैनी और उनकी टीम की कहानी देख रहा था | योगेश सैनी इंजीनियर हैं और अमेरिका में अपनी नौकरी छोड़कर माँ भारती की सेवा के लिए वापिस आएँ हैं | उन्होंने कुछ समय पहले दिल्ली को स्वच्छ ही नहीं, बल्कि सुन्दर बनाने का बीड़ा उठाया | उन्होंने अपनी टीम के साथ लोधी गार्डन के कूड़ेदानों से शुरुआत की | Street art के माध्यम से, दिल्ली के कई इलाकों को, खूबसूरत paintings से सजाने-संवारने का काम किया | Over Bridge और स्कूल की दीवारों से लेकर झुग्गी-झोपड़ियों तक, उन्होंने अपने हुनर को उकेरना शुरू किया तो लोगों का साथ भी मिलता चला गया और एक प्रकार से यह सिलसिला चल पड़ा | आपको याद होगा कि कुंभ के दौरान प्रयागराज को किस प्रकार street paintings से सजाया गया था | मुझे पता चला भई ! योगेश सैनी ने और उनकी टीम ने उसमें भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी | रंग और रेखाओं में कोई आवाज भले न होती हो, लेकिन इनसे बनी तस्वीरों से जो इन्द्रधनुष बनते हैं, उनका सन्देश हजारों शब्दों से भी कहीं ज्यादा प्रभावकारी सिद्ध होता है और स्वच्छता अभियान की खूबसूरती में भी ये बात हम अनुभव करते हैं | हमारे लिए बहुत जरुरी है कि Waste to wealth बनाने का culture हमारे समाज में Develop हो | एक तरह से कहें, तो हमें कचरे से कंचन बनाने की दिशा में, आगे बढ़ना है |
    मेरे प्यारे देशवासियो, पिछले दिनों, MyGov पर मैंने एक बड़ी ही दिलचस्प टिप्पणी पढ़ी | यह Comment जम्मू-कश्मीर के शोपियां के रहने वाले भाई मुहम्मद असलम का था |
उन्होंने लिखा – “मन की बात’ कार्यक्रम सुनना अच्छा लगता है | मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने अपने राज्य जम्मू-कश्मीर में Community Mobilization Programme - Back To Village  के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई | इस कार्यक्रम का आयोजन, जून महीने में हुआ था | मुझे लगता है कि ऐसे कार्यक्रम हर तीन महीने पर आयोजित किये जाने चाहिए | इसके साथ ही, कार्यक्रम की online monitoring की व्यवस्था भी होनी चाहिए | मेरे विचार से, यह अपनी तरह का, ऐसा पहला कार्यक्रम था, जिसमें जनता ने सरकार से सीधा संवाद किया |
भाई मुहम्मद असलम जी ने ये जो सन्देश मुझे भेजा और उसको पढ़ने के बाद ‘Back To Village’ Programme  के बारे में जानने की मेरी उत्सुकता बढ़ गई और जब मैंने इसके बारे में विस्तार से जाना तो मुझे लगा कि पूरे देश को भी इसकी जानकारी होनी चाहिए | कश्मीर के लोग विकास की मुख्यधारा से जुड़ने को कितने बेताब हैं, कितने उत्साही हैं यह इस कार्यक्रम से पता चलता है | इस कार्यक्रम में, पहली बार बड़े-बड़े अधिकारी सीधे गांवो तक पहुँचे | जिन अधिकारियों को कभी गाँव वालों ने देखा तक नहीं था, वो खुद चलकर उनके दरवाजे तक पहुँचे ताकि विकास के काम में आ रही बाधाओं को समझा जा सके, समस्याओं को दूर किया जा सके | ये कार्यक्रम हफ्ते भर चला और राज्य की सभी लगभग साढ़े चार हजार पंचायतों में सरकारी अधिकारियों ने गाँव वालों को सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी | ये भी जाना कि उन तक सरकारी सेवाएँ पहुँचती भी हैं या नहीं | पंचायतों को कैसे और मजबूत बनाया जा सकता है ? उनकी आमदनी को कैसे बढ़ाया जा सकता है ? उनकी सेवाएँ सामान्य मानवी के जीवन में क्या प्रभाव पैदा कर सकती हैं ? गाँव वालों ने भी खुलकर अपनी समस्याओं को बताया | साक्षरता, Sex Ratio, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण, बिजली, पानी, बालिकाओं की शिक्षा, Senior Citizen के प्रश्न, ऐसे कई विषयों पर भी चर्चा हुई |
    साथियो, ये कार्यक्रम कोई सरकारी खानापूर्ति नहीं थी कि अधिकारी दिन भर गाँव में घूमकर वापस लौट आएँ लेकिन इस बार अधिकारीयों ने दो दिन और एक रात पंचायत में ही बिताई | इससे उन्हें गाँव में समय व्यतीत करने का मौका मिला | हर किसी से मिलने का प्रयास किया | हर संस्थान तक पहुँचने की कोशिश की | इस कार्यक्रम को interesting  बनाने के लिए कई और चीजों को भी शामिल किया गया | खेलो इंडिया के तहत बच्चों के लिए खेल प्रतियोगिता कराई गई | वहीँ Sports Kits, मनरेगा के job cards और SC/ST Certificates भी बांटे गए | Financial Literacy Camps लगाए गए | Agriculture, Horticulture जैसे सरकारी विभागों की तरफ से Stalls लगाए गए, और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई | एक प्रकार से ये आयोजन, एक विकास उत्सव बन गया, जनभागीदारी का उत्सव बन गया, जन-जागृति का उत्सव बन गया | कश्मीर के लोग विकास के इस उत्सव में खुलकर के भागीदार बने | खुशी की बात ये है कि ‘Back To Village’ कार्यक्रम का आयोजन ऐसे दूर-दराज के गाँवों में भी किया गया, जहाँ पहुँचने में, सरकारी अधिकारियों को दुर्गम रास्तों से होकर पहाड़ियों को चढ़ते-चढ़ते कभी-कभी एक दिन, डेढ़ दिन पैदल यात्रा भी करनी पड़ी | ये अधिकारी उन सीमावर्ती पंचायतों तक भी पहुँचे, जो हमेशा Cross Border फायरिंग के साए में रहते हैं | यही नहीं शोपियां, पुलवामा, कुलगाम और अनंतनाग जिले के अति संवेदनशील इलाके में भी अधिकारी बिना किसी भय के पहुँचे | कई अफसर तो अपने स्वागत से इतने अभिभूत हुए कि वे दो दिनों से अधिक समय तक गाँवों में रुके रहे | इन इलाकों में ग्राम सभाओं का आयोजन होना, उसमें बड़ी संख्या में लोगों का भाग लेना और अपने लिए योजनाएँ तैयार करना, यह सब बहुत ही सुखद है | नया संकल्प, नया जोश और शानदार नतीजे | ऐसे कार्यक्रम और उसमें लोगों की भागीदारी ये बताती है कि कश्मीर के हमारे भाई-बहन Good Governance चाहते हैं | इससे यह भी सिद्ध हो जाता है कि विकास की शक्ति बम-बंदूक की शक्ति पर हमेशा भारी पड़ती है | ये साफ है कि जो लोग विकास की राह में नफरत फैलाना चाहते हैं, अवरोध पैदा करना चाहते हैं, वो कभी अपने नापाक इरादों में कामयाब नहीं हो सकते |        

मेरे प्यारे देशवासियो, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित श्रीमान दत्तात्रेय रामचंद्र बेंद्रे ने अपनी एक कविता में सावन माह की महिमा कुछ इस प्रकार प्रस्तुत की है |
इस कविता में उन्होंने कहा है –
होडिगे मडिगे आग्येद लग्ना | अदराग भूमि मग्ना |
अर्थात – बारिश की फुहार और पानी की धारा का बंधन अनोखा है और उसके सौंदर्य को देखकर पृथ्वी ‘मग्न’ है |
पूरे भारतवर्ष में अलग-अलग संस्कृति और भाषाओं के लोग सावन के महीने को अपने-अपने तरीके से celebrate करते हैं | इस मौसम में हम जब भी अपने आसपास देखते हैं तो ऐसा लगता है मानो धरती ने हरियाली की चादर ओढ़ ली हो | चारों ओर, एक नई ऊर्जा का संचार होने लगता है | इस पवित्र महीने में कई श्रद्धालु कांवड़ यात्रा और अमरनाथ यात्रा पर जाते हैं, जबकि कई लोग, नियमित रूप से उपवास करते हैं और उत्सुकतापूर्वक जन्माष्टमी और नाग पंचमी जैसे त्योहारों का इंतजार करते हैं | इस दौरान ही भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन का त्योहार भी आता है | सावन महीने की जब बात हो रही है, तो आपको यह जानकर बहुत खुशी होगी कि इस बार अमरनाथ यात्रा में पिछले चार वर्षों में सबसे ज़्यादा श्रद्धालु शामिल हुए हैं | 1 जुलाई से अब तक तीन लाख से अधिक तीर्थयात्री पवित्र अमरनाथ गुफा के दर्शन कर चुके हैं | 2015 में पूरे 60 दिनों तक तक चलने वाली इस यात्रा में जितने तीर्थयात्री शामिल हुए थे, उससे अधिक इस बार सिर्फ 28 दिनों में शामिल हो चुके हैं |
अमरनाथ यात्रा की सफलता के लिए, मैं खासतौर पर जम्मू-कश्मीर के लोगों और उनकी मेहमान-नवाजी की भी प्रशंसा करना चाहता हूँ | जो लोग भी यात्रा से लौटकर आते हैं, वे राज्य के लोगों की गर्मजोशी और अपनेपन की भावना के कायल हो जाते हैं | ये सारी चीज़ें भविष्य में पर्यटन के लिए बहुत लाभदायक साबित होने वाली हैं | मुझे बताया गया है कि उत्तराखंड में भी इस वर्ष जब से चारधाम यात्रा शुरू हुई है, तब से डेढ़ महीने के भीतर 8 लाख से अधिक श्रद्धालु, केदारनाथ धाम के दर्शन कर चुके हैं | 2013 में आई भीषण आपदा के बाद, पहली बार, इतनी रिकॉर्ड संख्या में तीर्थयात्री वहाँ पहुंचें  हैं |
मेरी आप सभी से अपील है कि देश के उन हिस्सों में आप जरुर जाएं, जिनकी खूबसूरती, मानसून के दौरान देखते ही बनती है |
अपने देश की इस खूबसूरती को देखने और अपने देश के लोगों के जज्बे को समझने के लिए, tourism और यात्रा, शायद, इससे बड़ा कोई शिक्षक नहीं हो सकता है |
मेरी, आप सभी को शुभकामना है कि सावन का यह सुंदर और जीवंत महीना आप सबमें नई ऊर्जा, नई आशा और नई उम्मीदों का संचार करे | उसी प्रकार से अगस्त महीना ‘भारत छोड़ो’ उसकी याद ले करके आता है | मैं चाहूँगा कि 15 अगस्त की कुछ विशेष तैयारी करें आप लोग | आजादी के इस पर्व को मनाने का नया तरीका ढूढें | जन भागीदारी बढ़ें | 15 अगस्त लोकोत्सव कैसे बने ? जनोत्सव कैसे बने ? इसकी चिंता जरुर करें आप | दूसरी ओर यही वह समय है, जब देश के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है | कई हिस्सों में देशवासी बाढ़ से प्रभावित हैं | बाढ़ से कई प्रकार के नुकसान भी उठाने पड़ते हैं | बाढ़ के संकट में घिरे उन सभी लोगों को मैं आश्वस्त करता हूँ, कि केंद्र, राज्य सरकारों के साथ मिलकर, प्रभावित लोगों को हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने का काम बहुत तेज गति से कर रहा है | वैसे जब हम TV देखते हैं तो बारिश का एक ही पहलू दिखता है – सब तरफ बाढ़, भरा हुआ पानी, ट्रैफिक जाम | मानसून की दूसरी तस्वीर – जिसमें आनंदित होता हुआ हमारा किसान, चहकते पक्षी, बहते झरने, हरियाली की चादर ओढ़े धरती – यह देखने के लिए तो आपको खुद ही परिवार के साथ बाहर निकलना पड़ेगा | बारिश, ताजगी और खुशी यानी – Freshness और Happiness दोनों ही अपने साथ लाती है | मेरी कामना है कि यह मानसून आप सबको लगातार खुशियों से भरता रहे | आप सभी स्वस्थ रहें |
मेरे प्यारे देशवासियो, ‘मन की बात’ – कहाँ शुरू करें, कहाँ रुकें - बड़ा मुश्किल काम लगता है, लेकिन, आखिर समय की सीमा होती है | एक महीने के इंतजार के बाद फिर आऊंगा | फिर मिलूँगा | महीने भर आप मुझे बहुत कुछ बातें बताना | मैं आने वाली ‘मन की बात’ में उसको जोड़ने का प्रयास करूँगा और मेरे युवा साथियों फिर से याद कराता हूँ | आप quiz competition का मौका मत छोड़िये | आप श्रीहरिकोटा जाने का जो अवसर मिलने वाला है इसको किसी भी हालत में जाने मत देना |
आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद | नमस्कार |

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