Sunday, 25 March 2018

‘मन की बात’ (42वीं कड़ी) प्रसारण तिथि: 25.03.2018


  मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | आज रामनवमी का पावन पर्व है | रामनवमी के इस पवित्र पर्व पर देशवासियों को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ | पूज्य बापू के जीवन में ‘राम नाम’ की शक्ति कितनी थी वो हमने उनके जीवन में हर पल देखा है | पिछले दिनों 26 जनवरी को जब ASEAN (आसियान) देशों के सभी महानुभाव यहाँ थे तो अपने साथ Cultural troop लेकर के आये थे और बड़े गर्व की बात है कि उसमें से अधितकतम देश, रामायण को ही हमारे सामने प्रस्तुत कर रहे थे |  यानी राम और रामायण, न सिर्फ़ भारत में लेकिन विश्व के इस भू-भाग में ASEAN countries में, आज भी उतने ही प्रेरणा और प्रभाव पैदा कर रहे हैं | मैं फिर एक बार आप सबको रामनवमी की शुभकामनाएँ देता हूँ |
मेरे प्यारे देशवासियो, हर बार की तरह इस बार भी मुझे आप सबके सारे पत्र, email, phone-call और comments बहुत बड़ी मात्रा में मिले हैं | कोमल ठक्कर जी ने MyGov पर - आपने संस्कृत के on-line courses शुरू करने के बारे में जो लिखा वो मैंने पढ़ा | IT professional होने के साथ-साथ, संस्कृत के प्रति आपका प्रेम देखकर बहुत अच्छा लगा | मैंने सम्बंधित विभाग से इस ओर हो रहे प्रयासों की जानकारी आप तक पहुँचाने के लिए कहा है | ‘मन की बात’ के श्रोता जो संस्कृत को लेकर कार्य करते हैं, मैं उनसे भी अनुरोध करूंगा कि इस पर विचार करें कि कोमल जी के सुझाव को कैसे आगे बढ़ाया जाए |
श्रीमान घनश्याम कुमार जी, गाँव बराकर, जिला नालन्दा, बिहार - आपके NarendraModiApp पर लिखे comments पढ़े | आपने जमीन में घटते जल-स्तर पर जो चिंता जताई है, वह निश्चित रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण है |
श्रीमान शकल शास्त्री जी, कर्नाटक - आपने शब्दों के बहुत ही सुन्दर तालमेल के साथ लिखा कि ‘आयुष्मान भारत’ तभी होगा जब ‘आयुष्मान भूमि’ होगी और ‘आयुष्मान भूमि’ तभी होगी जब हम इस भूमि पर रहने वाले प्रत्येक प्राणी की चिंता करेंगे | आपने गर्मियों में पशु-पक्षियों के लिए पानी रखने के लिए भी सभी से आग्रह किया है | शकल जी, आपकी भावनाओं को मैंने सभी श्रोताओं तक पहुँचा दिया है |
श्रीमान योगेश भद्रेशा जी, उनका कहना है कि मैं इस बार युवाओं से उनके स्वास्थ्य के बारे में बात करूँ | उन्हें लगता है कि Asian countries में तुलना करें तो हमारे युवा physically weak हैं | योगेश जी, मैंने सोचा है कि इस बार health को लेकर के सभी के साथ विस्तार से बात करूँ - Fit India की बात करूँ | और आप सब नौजवान मिल करके Fit India का movement भी चला सकते हैं |
  पिछले दिनों France के राष्ट्रपति काशी की यात्रा पर गए थे | वाराणसी के श्रीमान प्रशांत कुमार ने लिखा है कि उस यात्रा के सारे दृश्य, मन को छूने वाले थे, प्रभाव पैदा करने वाले थे | और, उन्होंने आग्रह किया था कि वो सारे फ़ोटो, सारे Video, social media पर प्रचारित करनी चाहिये | प्रशांत जी, भारत सरकार ने वो फ़ोटो उसी दिन social media और NarendraModiApp पर share कर दिए थे | अब आप उनको like करें और re-twit करें, अपने मित्रों को पहुँचाएँ |
Chennai से अनघा, जयेश और बहुत सारे बच्चों ने Exam Warrior पुस्तक के पीछे जो gratitude cards दिए हैं उन पर उन्होंने, अपने दिल में जो विचार आये, वो लिख कर मुझे ही भेज दिए हैं | अनघा, जयेश,  मैं आप सब बच्चों को बताना चाहता हूँ कि आपके इन पत्रों से मेरे दिनभर की थकान छू-मन्तर हो जाती है | इतने सारे पत्र, इतने सारे phone call, comments, इनमें से जो कुछ भी मैं पढ़ पाया, जो भी मैं सुन पाया और उसमें से बहुत सी चीजें हैं जो मेरे मन को छू गयी - सिर्फ़ उनके बारे में ही बात करूँ तो भी शायद महीनों तक मुझे लगातार कुछ-न-कुछ कहते ही जाना पड़ेगा |
इस बार ज्यादातर पत्र बच्चों के हैं जिन्होंने exam के बारे में लिखा है | छुट्टियों के अपने plan, share किये हैं | गर्मियों में पशु-पक्षियों के पानी की चिंता की है | किसान-मेलों और खेती को लेकर जो गतिविधियाँ देश-भर में चल रही हैं उसके बारे में किसान भाई-बहनों के पत्र आये हैं | Water conservation को लेकर के कुछ सक्रिय नागरिकों ने सुझाव भेजे हैं | जब से हम लोग आपस में ‘मन की बात’ रेडियो के माध्यम से कर रहे हैं तब से मैंने एक pattern देखा है कि गर्मियों में ज्यादातर पत्र, गर्मियों के विषय लेकर के आते हैं | परीक्षा से पहले विद्यार्थी-मित्रों की चिन्ताओं को लेकर के पत्र आते हैं | festival season में हमारे त्योहार, हमारी संस्कृति, हमारी परम्पराओं को लेकर के बातें आती हैं | यानी मन की बातें, मौसम के साथ बदलती भी हैं और शायद यह भी सच है कि हमारे मन की बातें, कहीं किसी के जीवन में मौसम भी बदल देती हैं | और क्यों न बदले ! आपकी इन बातों में, आपके इन अनुभवों में, आपके इन उदाहरणों में, इतनी प्रेरणा, इतनी ऊर्जा, इतना अपनापन, देश के लिए कुछ करने का जज़्बा रहता है | यह तो पूरे देश का ही मौसम बदलने की ताक़त रखता है | जब मुझे आपके पत्रों में पढ़ने को मिलता है कि कैसे असम के करीमगंज के एक रिक्शा-चालक अहमद अली ने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर ग़रीब बच्चों के लिए नौ (9) स्कूल बनवाये हैं - तब इस देश की अदम्य इच्छाशक्ति के दर्शन होते हैं | जब मुझे कानपुर के डॉक्टर अजीत मोहन चौधरी की कहानी सुनने को मिली कि वो फुटपाथ पर जाकर ग़रीबों को देखते हैं और उन्हें मुफ़्त दवा भी देते हैं - तब इस देश के बन्धु-भाव को महसूस करने का अवसर मिलता है | 13 साल पहले, समय पर इलाज़ न मिलने के कारण Kolkata के Cab-चालक सैदुल लस्कर (Saidul Laskar) की बहन की मृत्यु हो गयी - उन्होंने अस्पताल बनाने की ठान ली ताकि इलाज़ के अभाव में किसी ग़रीब की मौत न हो | सैदुल ने अपने इस mission में घर के गहने बेचे, दान के ज़रिये रूपये इकट्ठे किये | उनकी Cab में सफ़र करने वाले कई यात्रियों ने दिल खोलकर दान दिया | एक engineer बेटी ने तो अपनी पहली salary ही दे दी | इस तरह से रूपये जुटाकर 12 वर्षों के बाद, आख़िरकार सैदुल लस्कर ने जो भागीरथ प्रयास किया, वो रंग लाया और आज उन्हीं की इस कड़ी मेहनत के कारण, उन्हीं के संकल्प के कारण कोलकाता के पास पुनरी (punri) गाँव में लगभग 30 bed की क्षमता वाला अस्पताल बनकर तैयार है | यह है New India की ताक़त | जब उत्तरप्रदेश की एक महिला अनेकों संघर्ष के बावजूद 125 शौचालयों का निर्माण करती है और महिलाओं को उनके हक़ के लिए प्रेरित करती है - तब मातृ-शक्ति के दर्शन होते हैं | ऐसे अनेक प्रेरणा-पुंज मेरे देश का परिचय करवाते हैं | आज पूरे विश्व में भारत की ओर देखने का नज़रिया बदला है | आज जब, भारत का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है तो इसके पीछे माँ-भारती के इन बेटे-बेटियों का पुरुषार्थ छुपा हुआ है | आज देश भर में, युवाओं में, महिलाओं में, पिछड़ों में, ग़रीबो में, मध्यम-वर्ग में, हर वर्ग में यह विश्वास जगा है कि हाँ! हम आगे बढ़ सकते हैं, हमारा देश आगे बढ़ सकता है | आशा-उम्मीदों से भरा एक आत्मविश्वास का सकारात्मक माहौल बना है | यही आत्मविश्वास, यही positivity, New India का हमारा संकल्प साकार करेगी, सपना सिद्ध करेगी |   
    
मेरे प्यारे देशवासियो, आने वाले कुछ महीने किसान भाइयों और बहनों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं | इसी कारण ढ़ेर सारे पत्र, कृषि को लेकर के आए हैं | इस बार मैंने दूरदर्शन का DD Kisan Channel पर जो किसानों के साथ चर्चाएं होती हैं, उनके video भी मंगवा कर देखे और मुझे लगता है कि हर किसान को दूरदर्शन की ये DD Kisan Channel से जुड़ना चाहिए, उसे देखना चाहिए और उन प्रयोगों को अपने खेत में लागू करना चाहिए | महात्मा गाँधी से लेकर के शास्त्री जी हों, लोहिया जी हों, चौधरी चरण सिंह जी हों, चौधरी देवीलाल जी हों- सभी ने कृषि और किसान को देश की अर्थव्यवस्था और आम जन-जीवन का एक अहम् अंग माना | मिट्टी, खेत-खलिहान और किसान से महात्मा गाँधी को कितना लगाव था,ये भाव उनकी इस पंक्ति में झलकता है, जब उन्होंने कहा था-


‘To forget how to dig the earth and to tend the soil, is to forget ourselves.’
यानी, धरती को खोदना और मिट्टी का ख्याल रखना अगर हम भूल जाते हैं, तो ये स्वयं को भूलने जैसा है | इसी तरह, लाल बहादुर शास्त्री जी पेड़, पौधे और वनस्पति के संरक्षण और बेहतर कृषि-ढांचे की आवश्यकता पर अक्सर ज़ोर दिया करते थे | डॉ० राम मनोहर लोहिया ने तो हमारे किसानों के लिए बेहतर आय, बेहतर सिंचाई-सुविधाएँ और उन सब को सुनिश्चित करने के लिए और खाद्य एवं दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर जन-जागृति की बात कही थी | 1979 में अपने भाषण में चौधरी चरण सिंह जी ने किसानों से नई technology का उपयोग करने, नए innovation करने का आग्रह किया, इसकी आवश्यकता पर बल दिया | मैं पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित कृषि-उन्नति-मेले में गया था | वहाँ किसान भाई-बहनों और वैज्ञानिकों के साथ मेरी बातचीत, कृषि से जुड़े अनेक अनुभवों को जानना, समझना, कृषि से जुड़े innovations के बारे में जानना - ये सब मेरे लिए एक सुखद अनुभव तो था ही लेकिन जिस बात ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया वो था मेघालय और वहाँ के किसानों की मेहनत | कम क्षेत्रफल वाले इस राज्य ने बड़ा काम करके दिखाया है | मेघालय के हमारे किसानों ने वर्ष 2015-16 के दौरान, पिछले पाँच साल की तुलना में record पैदावार की है | उन्होंने दिखाया है कि जब लक्ष्य निर्धारित हो, हौसला बुलंद हो और मन में संकल्प हो तो उसे सिद्ध कर सकते हैं, करके दिखाया जा सकता है | आज किसानों की मेहनत को technology का साथ मिल रहा है, जिससे कृषि-उत्पादक को काफी बल मिला है | मेरे पास जो पत्र आये हैं, उसमें मैं देख रहा था कि बहुत सारे किसानों ने MSP के बारे में लिखा हुआ था और वो चाहते थे कि मैं इस पर उनके साथ विस्तार से बात करूँ |
भाइयो और बहनो, इस साल के बजट में किसानों को फसलों की उचित क़ीमत दिलाने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया गया है | यह तय किया गया है कि अधिसूचित फसलों के लिए MSP, उनकी लागत का कम-से-कम डेढ़ गुणा घोषित किया जाएगा | अगर मैं विस्तार से बताऊँ तो MSP के लिए जो लागत जोड़ी जायेगी उसमें दूसरे श्रमिक जो मेहनत और परिश्रम करते हैं- उनका मेहनताना, अपने मवेशी, मशीन या क़िराए पर लिए गए मवेशी या मशीन का ख़र्च, बीज का मूल्य, उपयोग की गयी हर तरह की खाद का मूल्य, सिंचाई का ख़र्च, राज्य सरकार को दिया गया Land Revenue, Working Capital के ऊपर दिया गया ब्याज़, अगर ज़मीन lease पर ली है तो उसका किराया और इतना ही नहीं, किसान जो ख़ुद मेहनत करता है या उसके परिवार में से कोई कृषि -कार्य में श्रम योगदान करता है, उसका मूल्य भी उत्पादन लागत में जोड़ा जाएगा | इसके अलावा, किसानों को फसल की उचित क़ीमत मिले इसके लिए देश में Agriculture Marketing Reform पर भी बहुत व्यापक स्तर पर काम हो रहा है | गाँव की स्थानीय मंडियां, Wholesale Market और फिर Global Market से जुड़े - इसका प्रयास हो रहा है | किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बहुत दूर नहीं जाना पड़े - इसके लिए देश के 22 हज़ार ग्रामीण हाटों को ज़रुरी infrastructure के साथ upgrade करते हुए APMC और e-NAM platform के साथ integrate किया जाएगा | यानी एक तरह से खेत से देश के किसी भी market के साथ connect -ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है |
  मेरे प्यारे देशवासियो, इस वर्ष महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती-वर्ष के महोत्सव की शुरुआत होगी | यह एक ऐतिहासिक अवसर है | देश कैसे यह उत्सव मनाये? स्वच्छ भारत तो हमारा संकल्प है ही, इसके अलावा सवा-सौ करोड़ देशवासी कंधे-से-कंधा मिलाकर कैसे गाँधी जी को उत्तम-से-उत्तम श्रद्धांजलि दे सकते हैं? क्या नये-नये कार्यक्रम किये जा सकते हैं? क्या नये-नये तौर-तरीक़े अपनाए जा सकते हैं? आप सबसे मेरा आग्रह है, आप MyGov के माध्यम से इस पर अपने विचार सबके साथ share करें | ‘गाँधी 150’ का logo क्या हो? slogan या मंत्र या घोष-वाक्य क्या हो? इस बारे में आप अपने सुझाव दें | हम सबको मिलकर बापू को एक यादगार श्रद्धांजलि देनी है और बापू को स्मरण करके उनसे प्रेरणा लेकर के हमारे देश को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाना है |
####( फ़ोन) ‘’नमस्ते आदरणीय प्रधानमंत्री जी ... मैं प्रीति चतुर्वेदी गुडगाँव से बोल रही हूँ ...प्रधानमंत्री जी , जिस तरह से आपने ‘स्वच्छ-भारत अभियान’ को एक सफलतापूर्ण अभियान बनाया है , अब समय आ गया है कि हम स्वस्थ-भारत अभियान को भी उसी तरह से सफल बनाएँ ...इस अभियान के लिए आप लोगों को,सरकारों को ,Institutions को किस तरह से Mobilise कर रहे हैं , इस पर हमें कुछ बताएं ..धन्यवाद ..  ‘’   

धन्यवाद, आपने सही कहा है और मैं मानता हूँ कि स्वच्छ भारत और स्वस्थ भारत दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं | स्वास्थ्य के क्षेत्र में आज देश conventional approach से आगे बढ़ चुका है | देश में स्वास्थ्य से जुड़ा हर काम जहाँ पहले सिर्फ Health Ministry की ज़िम्मेदारी होती थी, वहीं अब सारे विभाग और मंत्रालय चाहे वो स्वच्छता-मंत्रालय हो, आयुष-मंत्रालय हो, Ministry of Chemicals and Fertilizers हो, उपभोक्ता -मंत्रालय हो या महिला एवं बाल विकास मंत्रालय हो या तो राज्य सरकारें हों - साथ मिलकर स्वस्थ-भारत के लिए काम कर रहे हैं और preventive health के साथ-साथ affordable health के ऊपर ज़ोर दिया जा रहा है | Preventive health-care सबसे सस्ता भी है और सबसे आसान भी है | और हम लोग, preventive health-care के लिए जितना जागरूक होंगें उतना व्यक्ति को भी, परिवार को भी और समाज को भी लाभ होगा | जीवन स्वस्थ हो इसके लिए पहली आवश्यकता है - स्वच्छता | हम सबने एक देश के रूप में बीड़ा उठाया और इसका परिणाम यह आया कि पिछले लगभग 4 सालों में sanitation coverage दोगुना होकर करीब-करीब 80 प्रतिशत (80%) हो चुका है | इसके अलावा, देश-भर में Health Wellness Centres बनाने की दिशा में व्यापक स्तर पर काम हो रहा है | Preventive health-care के रूप में योग ने, नये सिरे से दुनिया-भर में अपनी पहचान बनाई है | योग, fitness और wellness दोनों की गारंटी देता है | यह हम सबके commitment का ही परिणाम है कि योग आज एक mass movement बन चुका है, घर-घर पहुँच चुका है | इस बार के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून - इसके बीच 100 दिन से भी कम दिन बचे हैं | पिछले तीन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवसों पर देश और दुनिया के हर जगह, लोगों ने काफी उत्साह से इसमें भाग लिया | इस बार भी हमें सुनिश्चित करना है कि हम स्वयं योग करें और पूरे परिवार, मित्रों, सभी को, योग के लिए अभी से प्रेरित करें | नए रोचक तरीक़ों से योग को बच्चों में, युवाओं में, senior citizens में - सभी आयु-वर्ग में, पुरुष हो या महिला, हर किसी में popular करना है | वैसे तो देश का TV और electronic media साल-भर योग को लेकर अलग-अलग कार्यक्रम करता ही है, पर क्या अभी से लेकर योग दिवस तक - एक अभियान के रूप में योग के प्रति जागरूकता पैदा कर सकते हैं ?
मेरे प्यारे देशवासियो, मैं योग teacher तो नहीं हूँ | हाँ, मैं योग practitioner जरुर हूँ, लेकिन कुछ लोगों ने अपनी creativity के माध्यम से मुझे योग teacher भी बना दिया है | और मेरे योग करते हुए 3D animated videos बनाए हैं | मैं आप सबके साथ यह video, share करूँगा ताकि हम साथ-साथ आसन, प्राणायाम का अभ्यास कर सकें | Health care accessible हो और affordable भी हो ,जन सामान्य के लिए सस्ता और सुलभ हो - इसके लिए भी व्यापक स्तर पर प्रयास हो रहे हैं | आज देश-भर में 3 हज़ार से अधिक जन-औषधि केंद्र खोले गए हैं जहाँ 800 से ज्यादा दवाइयाँ कम क़ीमत पर उपलब्ध करायी जा रही हैं | और भी नए केंद्र खोले जा रहे हैं | ‘मन की बात’ के श्रोताओं से मेरी अपील है कि ज़रुरतमंदों को इन जन-औषधि केंद्रों की जानकारी पहुचाएँ - उनका बहुत दवाइयों का ख़र्च कम हो जाएगा | उनकी बहुत बड़ी सेवा होगी | हृदय-रोगियों के लिए heart stent की कीमत 85% तक कम कर दी गई है | Knee Implants की क़ीमतों को भी नियंत्रित कर 50 से 70% तक कम कर दिया गया है | ‘आयुष्मान भारत योजना’ के तहत लगभग 10 करोड़ परिवार यानी क़रीब 50 करोड़ नागरिकों को इलाज के लिए 1 साल में 5 लाख रूपए का ख़र्च, भारत सरकार और Insurance company मिलकर के देंगी | देश के मौजूदा 479 medical कॉलेजों में MBBS की सीटों की संख्या बढ़ाकर लगभग 68 हज़ार कर दी गई हैं | देश-भर के लोगों को बेहतर इलाज और स्वास्थ्य-सुविधा मिले इसके लिए विभिन्न राज्यों में नए AIIMS खोले जा रहे हैं | हर 3 ज़िलों के बीच एक नया medical college खोला जाएगा | देश को 2025 तक टी.बी. मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है | यह बहुत बड़ा काम है | जन-जन तक जागृति पहुँचाने में आपकी मदद चाहिए | टी.बी. से मुक्ति पाने के लिए हम सबको सामूहिक प्रयास करना होगा |
   मेरे प्यारे देशवासियो, 14 अप्रैल डॉ० बाबा साहब आम्बेडकर की जन्म-जयंती है | वर्षों पहले डॉ० बाबा साहब आम्बेडकर ने भारत के औद्योगिकीकरण की बात कही थी | उनके लिए उद्योग एक ऐसा प्रभावी-माध्यम था जिसमें ग़रीब-से-ग़रीब व्यक्ति को रोज़गार उपलब्ध कराया जा सकता था | आज जब देश में Make in India का अभियान सफलतापूर्वक चल रहा है तो डॉ० आम्बेडकर जी ने industrial super power के रूप में भारत का जो एक सपना देखा था-उनका ही vision आज हमारे लिए प्रेरणा है | आज भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक bright spot के रूप में उभरा है और आज पूरे विश्व में सबसे ज़्यादा Foreign Direct Investment, FDI भारत में आ रहा है | पूरा विश्व भारत को निवेश innovation और विकास के लिए HUB के रूप में देख रहा है | उद्योगों का विकास शहरों में ही संभव होगा यही सोच थी जिसके कारण डॉ० बाबा साहब आम्बेडकर ने भारत के शहरीकरण, urbanization पर भरोसा किया | उनके इस vision को आगे बढ़ाते हुए आज देश में smart cities mission और urban mission की शुरुआत की गई ताकि देश के बड़े नगरों और छोटे शहरों में हर तरह की सुविधा - चाहे वो अच्छी सड़के हों, पानी की व्यवस्था हो, स्वास्थ्य की सुविधाएँ हो, शिक्षा हो या digital connectivity उपलब्ध कराई जा सके | बाबा साहब का self-reliance, आत्मनिर्भरता में दृढ़ विश्वास था | वे नहीं चाहते थे कि कोई व्यक्ति हमेशा ग़रीबी में अपना जीवन जीता रहे | इसके साथ-साथ वे यह भी मानते थे कि ग़रीबों में सिर्फ़ कुछ बाँट देने से उनकी ग़रीबी दूर नहीं की जा सकती | आज मुद्रा योजना, Start Up India, Stand Up India initiatives हमारे युवा innovators, युवा entrepreneurs को जन्म दे रही है | 1930 और 1940 के दशक में जब भारत में सिर्फ सड़कों और रेलवे की बात होती थी उस समय, बाबा साहब आम्बेडकर ने बंदरगाहों और जलमार्गों के बारे में बात की थी | ये डॉ० बाबा साहब ही थे जिन्होंने जल-शक्ति को राष्ट्र-शक्ति के रूप में देखा | देश के विकास के लिए पानी के उपयोग पर बल दिया | विभिन्न river valley authorities,जल से संबंधित अलग-अलग commissions- ये सब बाबा साहब आम्बेडकर का ही तो vision था | आज देश में जलमार्ग और बंदरगाहों के लिए ऐतिहासिक प्रयास हो रहे हैं | भारत के अलग-अलग समुद्र-तटों पर नए बंदरगाह बन रहे हैं और पुराने बंदरगाहों पर infrastructure को मज़बूत किया जा रहा है | 40 के दशक के कालखंड में ज़्यादातर चर्चा 2nd World War, emerging Cold-War और विभाजन को लेकर के हुआ करती थी - उस समय डॉ० आम्बेडकर ने एक तरह से team India की spirit की नींव रख दी थी | उन्होंने federalism, संघीय-व्यवस्था के महत्व पर बात की और देश के उत्थान के लिए केंद्र और राज्यों के साथ मिलकर काम करने पर बल दिया | आज हम ने शासन के हर पहलू में सहकारी संघवाद, co-operative federalism और उससे आगे बढ़ करके competitive cooperative federalism के मन्त्र को अपनाया है और सबसे महत्वपूर्ण बात कि डॉ० बाबा साहब आम्बेडकर  पिछड़े वर्ग से जुड़े मुझ जैसे करोड़ों लोगों के लिए एक प्रेरणा हैं | उन्होंने हमें दिखाया है कि आगे बढ़ने के लिए यह ज़रुरी नहीं है कि बड़े या किसी अमीर परिवार में ही जन्म हो बल्कि भारत में ग़रीब परिवारों में जन्म लेने वाले लोग भी अपने सपने देख सकते हैं, उन सपनों को पूरा करने का प्रयास कर सकते हैं और सफलता भी प्राप्त कर सकते हैं | हाँ, ऐसा भी हुआ जब बहुत से लोगों ने डॉ० बाबा साहब आम्बेडकर का मज़ाक उड़ाया | उन्हें पीछे करने की कोशिश की | हर संभव-प्रयास किया कि ग़रीब और पिछड़े परिवार का बेटा आगे न बढ़ पाए, कुछ बन न पाए, जीवन में कुछ हासिल न कर पाए | लेकिन, New India की तस्वीर बिलकुल अलग है | एक ऐसा India जो आम्बेडकर का है, ग़रीबों का है, पिछड़ों का है | डॉ० आम्बेडकर की जन्म जयंती के अवसर पर 14 अप्रैल से 5 मई तक ‘ग्राम-स्वराज अभियान’ आयोजित किया जा रहा है | इसके तहत पूरे भारत में ग्राम-विकास, ग़रीब-कल्याण और सामाजिक-न्याय पर अलग-अलग कार्यक्रम होंगे | मेरा, आप सभी से आग्रह है कि इस अभियान में बढ़-चढ़ करके हिस्सा लें |
    मेरे प्यारे देशवासियो, अगले कुछ दिनों में कई त्योहार आने वाले हैं | भगवान महावीर जयंती, हनुमान जयंती, ईस्टर, वैसाखी | भगवान महावीर की जयंती का दिन उनके त्याग और तपस्या को याद करने का दिन है | अहिंसा के संदेशवाहक भगवान महावीर जी का जीवन,दर्शन हम सभी के लिए प्रेरणा देगी | समस्त देशवासियों को महावीर जयंती की शुभकामनाएँ | ईस्टर की चर्चा आते ही प्रभु ईसा मसीह के प्रेरणादायक उपदेश याद आते हैं जिन्होंने सदा ही मानवता को शांति, सद्भाव, न्याय, दया और करुणा का सन्देश दिया है | अप्रैल में पंजाब और पश्चिम भारत में वैसाखी का उत्सव मनाया जाएगा, तो उन्हीं दिनों, बिहार में जुड़शीतल एवं सतुवाईन , असम में बिहू तो पश्चिम बंगाल में पोइला वैसाख का हर्ष और उल्लास छाया रहेगा | ये सारे पर्व किसी-न-किसी रूप में हमारे खेत-खलिहानों और अन्नदाताओं से जुड़े हुए हैं | इन त्योहारों के माध्यम से हम उपज के रूप में मिलने वाले अनमोल उपहारों के लिए प्रकृति का धन्यवाद करते हैं | एक बार फिर आप सब को आने वाले सभी त्योहारों की ढ़ेरों शुभकामनाएँ | बहुत-बहुत धन्यवाद |                      
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Tuesday, 20 March 2018

प्रकृति पर्व - सरहुल



झारखंड प्रदेश हमारे देश का एक अहम  राज्य है जो दुनिया भर में अपनी  खानों और अपने खनिजों के लिए प्रसिद्ध है. झारखंड राज्य अपने नाम के ही अनुरूप  झाड़, जंगल और हरियाली से भरपूर है . इसकी पहचान सिर्फ यहाँ  के खनिज  पदार्थों से ही नहीं बल्कि अपने जनजातीय समूह की वजह से भी है. यहाँ का जनजातीय यानि आदिवासी समाज बेहद शांति प्रिय और ज़मीन से जुड़ा हुआ है. झारखंड के आदिवासी अपने रहन सहन में जितने सरल हैं, उनकी धरोहर  उतनी ही धनी है.




सरहुल इसी अनकही और अनसुनी सभ्यता का महापर्व हैं. सरहुल का शाब्दिक अर्थ होता है, साल के पेड़ की पूजा.


झारखंड साल की लकड़ी और पत्तों का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है और इसके पत्ते कटोरे बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं जिनमें  त्यौहारों के दौरान प्रसाद वितरित किया जाता  है. साल की  पत्तियों का  पान बनाने के लिए भी उपयोग किया जाता है. साल का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं में एक कसैले पदार्थ के रूप में भी किया जाता है और इसके बीजों का उपयोग दीयों का  तेल बनाने के लिए किया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि सरहुल की प्रथा महाभारत के युग से चली आ रही है . कहानियों के अनुसार महाभारत के युद्ध में कई आदिवासियों ने कौरवों की तरफ से पांडवों के विरुद्ध लड़ाई में भाग लिया था . इनके मृत सैनिकों के शरीर की पहचान करने के लिए  उनके समुदाय के लोग उनके मृत शरीर को साल के पत्तों से ढक देते थे . जहाँ दूसरी लाशें सड़ने लगती थी वहीं पर  साल के पत्तों से ढके मृत शरीर लम्बे समय तक भी ख़राब नहीं होते थे . झारखंड का आदिवासी समुदाय प्रकृति की पूजा करता है अपने त्यौहारों  में  प्रकृति के हर रूप  पानी, धरती पहाड़ , जंगल को अपनी प्रार्थनाएं अर्पित करते हुए  अच्छी फसल, अच्छी बारिश और खुशहाली की कामना करता है.

सरहुल यूँ तो उरांव या कुड़ुख समुदाय का मुख्य रूप से मनाया जाने वाला पर्व है लेकिन झारखंड , छत्तीसगढ़ , अंडमान और जहाँ कहीं  भी झारखंड जनजातीय बस्ती है वहीं इसे धूमधाम से मनाया जाता है . क्या आप जानते हैं सरहुल के त्यौहार के पहले जितने भी नए खाने वाले फल या फूल जैसे  कोंहड़ा फूल, बड़ी , फुटकल, जोकी(सहजन), खुखरी और संधना, कटहल , सेम इत्यादि उनका सेवन नहीं किया जाता और  सरहुल की पूजा हो जाने के बाद ही इन्हें  खाया जाता है. सरहुल तीन दिन तक पूरे हर्षोल्लास और आस्था के साथ मनाया जाने वाला त्यौहार है. सरहुल के पहले दिन  घरों ,पूजा स्थलों ,साल के पेड़ों की साफ सफाई और सजावट  की जाती हैं .  त्यौहार में बनने वाले खास व्यंजनों के लिए सामग्री खरीदी जाती है और परिवार के मुखिया व्रत भी रखते हैं . घर के कुओं को भी साफ़ किया जाता है  और यह एक ख़ास उद्देश्य से किया जाता हैं . साफ़ करने के बाद रात भर  इस साफ़ कुएं  में  जितना पानी जमा हो जाता है उसे घड़ों में भर का पूजा स्थलों पर ले जाया जाता है और पानी से भरे ये घड़े वही पर  छोड़ दिए जाते हैं. अगले दिन फिर उन घड़ों को देखा जाता हैं और माना जाता हैकि  यदि उन घड़ों में से पानी घट गया तो इसका मतलब है कि आने वाले साल में बारिश कम होगी लेकिन यदि घड़े में पानी लबालब भरा रहा तो आने वाले साल में बारिश बहुत अच्छी होगी.  उस समुदाय के बड़े बुजुर्गों का मानना है  कि  इस परंपरा की भविष्यवाणी  कभी गलत नहीं होती .

खैर बात आस्था और विश्वास की है. पाहन (पुजारी) के पूजा के बाद प्रसाद के रूप में हड़ियाँ (चावल से बानी पेय) दी जाती है.  सरहुल के तीसरे दिन , लाल पड़िया साड़ी , धोती और ख़ूबसूरत वेशभूषा में सज कर लोग मांदर , ढोल , नगाड़ों और तुरही के साथ भव्य शोभा यात्रा निकालते हैं , इस शोभा यात्रा में झांकियां भी निकाली जाती हैं जो झारखंड की विभिन्न्न  परंपराओं  और स्वरुप को दिखाती हैं . फिर एक दूसरे को गुलाल लगते हुए  और कतारों में 'जोड़ा के नाच नाच कर' सरहुल का त्यौहार अपने अंतिम  पड़ाव पर पहुँचता है.



शोभा यात्रा ख़त्म होने के बाद भी सरहुल का महोत्सव का अंत नहीं होता . रात भर स्वादिष्ट व्यंजनों और नाच गाने के साथ सरहुल के पर्व की विदाई इस आशा के साथ की जाती है कि आने वाला नया वर्ष  सभी के लिए मंगलमय हो, फसल अच्छी हो और हर तरफ खुशहाली छाई रहे .

Sunday, 25 February 2018

‘मन की बात’ (41वीं कड़ी) ,प्रसारण तिथि: 25.02.2018


‘मन की बात’ (41वीं कड़ी)
प्रसारण तिथि: 25.02.2018


मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार |
आज प्रारम्भ में ही ‘मन की बात’ एक फ़ोन-कॉल से ही शुरू करते हैं |
(फ़ोन # )
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, मैं कोमल त्रिपाठी मेरठ से बोल रही हूँ.. 28 तारीख को national science day है ... India की progress और  उसका growth, science से पूरी तरह से जुड़ा हुआ है .. जितना ही हम इसमें research और innovation करेंगे उतना ही हम आगे बढ़ेंगे और prosper करेंगे .. क्या आप हमारे युवाओं को motivate करने के लिए कुछ ऐसे शब्द कह सकते हैं जिससे कि वो scientific  तरीक़े से अपनी सोच को आगे बढाएं और हमारे देश को भी आगे बढ़ा सकें ..धन्यवाद .

आपके फ़ोन-कॉल के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद | विज्ञान को लेकर ढ़ेर सारे प्रश्न मेरे युवा साथियों ने मुझसे पूछे हैं, कुछ-न-कुछ लिखते रहते हैं | हमने देखा है कि समुन्दर का रंग नीला नज़र आता है लेकिन हम अपने दैनिक जीवन के अनुभवों से जानते हैं कि पानी का कोई रंग नहीं होता है | क्या कभी हमने सोचा है कि नदी हो, समुन्दर हो, पानी रंगीन क्यों हो जाता है ? यही प्रश्न 1920 के दशक में एक युवक के मन में आया था | इसी प्रश्न ने आधुनिक भारत के एक महान वैज्ञानिक को जन्म दिया | जब हम विज्ञान की बात करते हैं तो सबसे पहले भारत-रत्न सर सी.वी. रमन का नाम हमारे सामने आता है | उन्हें light scattering यानि प्रकाश के प्रकीर्णन पर उत्कृष्ट कार्य के लिए नोबल-पुरस्कार प्रदान किया गया था | उनकी एक ख़ोज ‘Raman effect’ के नाम से प्रसिद्ध है | हम हर वर्ष 28 फ़रवरी को ‘National Science Day मनाते हैं क्योंकि कहा जाता है कि इसी दिन उन्होंने light scattering की घटना की ख़ोज की थी | जिसके लिए उन्हें नोबल- पुरस्कार दिया गया | इस देश ने विज्ञान के क्षेत्र में कई महान वैज्ञानिकों को जन्म दिया है | एक तरफ़ महान गणितज्ञ बोधायन, भास्कर, ब्रह्मगुप्त और आर्यभट्ट की परंपरा रही है तो दूसरी तरफ़ चिकित्सा के क्षेत्र में सुश्रुत और चरक हमारा गौरव हैं | सर जगदीश चन्द्र बोस और हरगोविंद खुराना से लेकर सत्येन्द्र नाथ बोस जैसे वैज्ञानिक-ये भारत के गौरव हैं | सत्येन्द्र नाथ बोस के नाम पर तो famous particle Boson’ का नामकरण भी किया गया | हाल ही मुझे मुम्बई में एक कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला -  Wadhwani Institute for Artificial Intelligence के उद्घाटन का | विज्ञान के क्षेत्र में जो चमत्कार हो रहे हैं, उनके बारे में जानना बड़ा दिलचस्प  था |  Artificial Intelligence के माध्यम से Robots, Bots और specific task करने वाली मशीनें बनाने में सहायता मिलती है | आजकल मशीनें self learning से अपने आप के intelligence को और smart बनाती जाती हैं | इस technology का उपयोग ग़रीबों, वंचितों या ज़रुरतमंदों का जीवन बेहतर करने के काम आ सकता है | Artificial Intelligence के उस कार्यक्रम में मैंने वैज्ञानिक समुदाय से आग्रह किया कि दिव्यांग भाइयों और बहनों का जीवन सुगम बनाने के लिए, किस तरह से Artificial Intelligence से मदद मिल सकती है ? क्या हम Artificial Intelligence के माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं के बारे में बेहतर अनुमान लगा सकते हैं ? किसानों को फ़सलों की पैदावार को लेकर कोई सहायता कर सकते हैं ? क्या Artificial Intelligence स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को आसान बनाने और आधुनिक तरीक़े से बीमारियों के इलाज़ में सहायक हो सकता है ?
 
पिछले दिनों इज़राइल के प्रधानमंत्री के साथ मुझे गुजरात में, अहमदाबाद में ‘I Create’ के उद्घाटन के लिए जाने का अवसर मिला था | वहाँ एक नौजवान ने, एक ऐसा digital instrument develop किया हुआ बताया उसने कि जिसमें अगर कोई बोल नहीं सकता है तो उस instrument के माध्यम से अपनी बात लिखते ही वो voice में convert होती है और आप वैसे ही सम्वाद कर सकते हैं जैसे कि एक बोल सकने वाले व्यक्ति के साथ आप करते हैं | मैं समझता हूँ कि Artificial Intelligence का उपयोग ऐसी कई विधाओं में हम कर सकते हैं |

Science and Technology, value neutral होती हैं | इनमें मूल्य, अपने आप नहीं होते हैं | कोई भी मशीन वैसा ही कार्य करेगी जैसा हम चाहेंगे | लेकिन, यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम मशीन से क्या काम लेना चाहते हैं | यहाँ पर मानवीय-उद्धेश्य महत्वपूर्ण हो जाता है | विज्ञान का मानव-मात्र कल्याण के लिए उपयोग, मानव जीवन की सर्वोच्च ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रयोग |

Light Bulb का आविष्कार करने वाले Thomas Alva Edison अपने प्रयोगों में कई बार असफ़ल रहे | एक बार उनसे जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया “मैंने Light Bulb नहीं बनाने के दस हज़ार तरीक़े खोज़े हैं”, यानि Edison ने अपनी असफलताओं को भी अपनी शक्ति बना लिया | संयोग से सौभाग्य है कि आज मैं महर्षि अरबिन्दो की कर्मभूमि ‘Auroville’ में हूँ | एक क्रांतिकारी के रूप में उन्होंने ब्रिटिश शासन को चुनौती दी, उनके ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी, उनके शासन पर सवाल उठाए | इसी प्रकार उन्होंने एक महान ऋषि के रूप में, जीवन के हर पहलू के सामने सवाल रखा | उत्तर खोज़ निकाला और मानवता को राह दिखाई | सच्चाई को जानने के लिए बार-बार प्रश्न पूछने की भावना, महत्वपूर्ण है | वैज्ञानिक ख़ोज के पीछे की असल प्रेरणा भी तो यही है | तब तक चैन से नहीं बैठना चाहिये जब तक क्यों, क्या और कैसे जैसे प्रश्नों का उत्तर न मिल पाए | National Science Day  के अवसर पर हमारे वैज्ञानिकों, विज्ञान से जुड़े सभी लोगों को मैं बधाई देता हूँ | हमारी युवा-पीढ़ी, सत्य और ज्ञान की खोज़ के लिए प्रेरित हो, विज्ञान की मदद से समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित हो, इसके लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ हैं |

साथियो, crisis के समय safety, disaster इन सारे विषयों पर मुझे बहुत बार बहुत कुछ सन्देश आते रहते हैं, लोग मुझे कुछ-न-कुछ लिखते रहते हैं | पुणे से श्रीमान रवीन्द्र सिंह ने NarendraModi mobile App पर अपने comment में occupational safety पर बात की है | उन्होंने लिखा है कि हमारे देश में factories और constructions sites पर safety standards उतने अच्छे नहीं हैं | अगले 4 मार्च को भारत का National Safety Day है, तो प्रधानमंत्री अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में safety पर बात करें ताकि लोगों में safety को लेकर जागरूकता बढ़े | जब हम public safety  की बात करते हैं तो दो चीज़ें बहुत महत्वपूर्ण होती हैं pro-activeness और दूसरा है preparedness | safety दो प्रकार की होती है एक वो जो आपदा के समय जरुरी होती है, safety during disasters और दूसरी वो जिसकी दैनिक जीवन में आवश्यकता पड़ती है, safety in everyday life | अगर हम दैनिक जीवन में safety को लेकर जागरूक नहीं हैं, उसे हासिल नहीं कर पा रहे हैं तो फिर आपदा के दौरान इसे पाना मुश्किल हो जाता है | हम सब बहुत बार रास्तों पर लिखे हुए board पढ़ते हैं | उसमें लिखा होता है –

- “सतर्कता हटी-दुर्घटना घटी”,
- “एक भूल करे नुकसान, छीने खुशियाँ और मुस्कान”,
- “इतनी जल्दी न दुनिया छोड़ो, सुरक्षा से अब नाता जोड़ो”
- “सुरक्षा से न करो कोई मस्ती, वर्ना ज़िंदगी होगी सस्ती”    

 उससे आगे उन वाक्य का हमारे जीवन में कभी-कभी कोई उपयोग ही नहीं होता है | प्राकृतिक आपदाओं को अगर छोड़ दें तो ज़्यादातर दुर्घटनाएँ, हमारी कोई-न-कोई गलती का परिणाम होती हैं | अगर हम सतर्क रहें, आवश्यक नियमों का पालन करें तो हम अपने जीवन की रक्षा तो कर ही सकते हैं, लेकिन, बहुत बड़ी दुर्घटनाओं से भी हम समाज को बचा सकते हैं | कभी-कभी हमने देखा है कि work place पर safety को लेकर बहुत सूत्र लिखे गए होते हैं लेकिन जब देखते हैं तो कहीं पर उसका पालन नज़र नहीं आता है | मेरा तो आग्रह है कि महानगर पालिका, नगर पालिकाएँ जिनके पास fire brigade होते हैं उन्हें हफ़्ते में एक बार या महीने में एक बार अलग-अलग स्कूलों में जा करके स्कूल के बच्चों के सामने mock drill  करना चाहिये | उससे दो फायदे होंगे - fire brigade को भी सतर्क रहने की आदत रहती है और नयी पीढ़ी को इसकी शिक्षा भी मिलती है और इसके लिए न कोई अलग खर्चा होता है - एक प्रकार से शिक्षा का ही एक क्रम बन जाता है और मैं हमेशा इस बात का आग्रह करता रहता हूँ | जहाँ तक आपदाओं की बात है, disasters की बात है, तो भारत भौगोलिक और जलवायु की दृष्टि से विविधताओं से भरा हुआ देश है | इस देश ने कई प्राक्रतिक और मानव-निर्मित आपदाएँ, जैसे रासायनिक एवं औद्योगिक दुर्घटनाओं को झेला है | आज National Disaster Management Authority यानी NDMA देश में आपदा-प्रबंधन की अगुवाई कर रहा है | भूकंप हो, बाढ़ हो, Cyclone हो, भूस्खलन हो जैसे विभिन्न आपदाओं को, rescue operation हो, NDMA तुरंत पहुँचता है | उन्होंने guidelines भी जारी किये हैं, साथ-साथ वो capacity building के लिए लगातार training के काम भी करते रहते हैं | बाढ़, cyclone के खतरे में होने वाले ज़िलों में volunteers के प्रशिक्षण के लिए भी ‘आपदा मित्र’ नाम की पहल की गई है | प्रशिक्षण और जागरूकता का बहुत महत्वपूर्ण रोल है | आज से दो-तीन साल पहले लू heat wave से प्रतिवर्ष हजारों लोग अपनी जान गवाँ देते थे | इसके बाद NDMA ने heat wave के प्रबंधन के लिए workshop आयोजित किये, लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए अभियान चलाया | मौसम विभाग ने सटीक पूर्वानुमान लगाये | सबकी भागीदारी से एक अच्छा परिणाम सामने आया | 2017 में लू से होने वाली मौतों की संख्या अप्रत्याशित रूप से घटकर क़रीब-क़रीब 220 पर आ गई | इससे पता चलता है कि अगर हम सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, हम सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं | समाज में इस प्रकार से काम करने वाले अनगिनत लोग हों, सामाजिक संगठन हों, जागरूक नागरिक हों - मैं उन सब की सराहना करना चाहता हूँ, जो कहीं पर भी आपदा हो मिनटों के अन्दर राहत और बचाव कार्य में जुट जाते हैं | और ऐसे गुमनाम heroes की संख्या कोई कम नहीं है | हमारी Fire and Rescue Services, National Disaster Response Forces, सशस्त्र सेनाएँ, Paramilitary Forces, ये भी संकट के समय पहुँचने वाले वीर बहादुर अपनी जान की परवाह किये बिना लोगों की मदद करते हैं | NCC, Scouts जैसे संगठन भी इन कामों को आजकल कर भी रहे हैं, training भी कर रहे हैं | पिछले दिनों हमने एक प्रयास ये भी शुरू किया है कि जैसे दुनिया के देशों में joint military exercise होती है तो क्यों न दुनिया के देश Disaster Management के लिए भी joint exercise करें | भारत ने इसको lead किया है – BIMSTEC, बांग्लादेश, भारत, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल, इन देशों की एक joint disasters management exercise  भी की गई, ये अपने आप में एक पहला और बड़ा मानवीय प्रयोग था | हमें एक risk conscious society बनना होगा | अपनी संस्कृति में हम मूल्यों की रक्षा, safety of values के बारे में तो अक्सर बातें करते हैं, लेकिन हमें values of safety, सुरक्षा के मूल्यों को भी समझना होगा | हमें उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा | हमारे सामान्य जीवन में हमने देखा है कि हम सैकड़ों बार हवाई जहाज में यात्रा करते हैं और हवाई जहाज के अंदर air hostess प्रारंभ में safety के संबंध में सूचनाएँ देती है | हम सब ने सौ-बार इसको सुना होगा लेकिन आज हमें कोई हवाई जहाज में ले जा करके खड़ा करे और पूछे कि बताइये कौन सी चीज़ कहाँ है ? life jacket कहाँ है ? कैसे उपयोग करना चाहिए ? मैं दावे से कहता हूँ हममें से कोई नहीं बता पायेगा | मतलब ये हुआ कि क्या जानकारी देने की व्यवस्था थी ? थी | प्रत्यक्ष उस तरफ़ नज़र करके देखने के लिए सम्भावना थी ? थी | लेकिन हमने किया नहीं | क्यों ? क्योंकि हम स्वभाव से conscious नहीं हैं और इसलिए हमारे कान, हवाई जहाज बैठने के बाद सुनते तो हैं लेकिन ‘ये सूचना मेरे लिए है’ ऐसा हममें से किसी को लगता ही नहीं है | वैसा ही जीवन के हर क्षेत्र में हमारा अनुभव है | हम ये न सोचें कि safety किसी और के लिए है, अगर हम सब अपनी safety के लिए सजग हो जाएँ तो समाज की safety का भाव भी अन्तर्निहित होता है |

    मेरे प्यारे देशवासियो, इस बार बजट में ‘स्वच्छ भारत’ के तहत गाँवों के लिए बायोगैस के माध्यम से waste to wealth और waste to energy बनाने पर ज़ोर दिया गया | इसके लिए पहल शुरू की गई और इसे नाम दिया गया ‘GOBAR-Dhan’ - Galvanizing Organic Bio-Agro Resources | इस ‘GOBAR-Dhan’ योजना का उद्देश्य है, गाँवों को स्वच्छ बनाना और पशुओं के गोबर और खेतों के ठोस अपशिष्ट पर्दाथों को COMPOST और BIO-GAS में परिवर्तित कर, उससे धन और ऊर्जा generate करना | भारत में मवेशियों की आबादी पूरे विश्व में सबसे ज़्यादा है | भारत में मवेशियों की आबादी लगभग 30 करोड़ है और गोबर का उत्पादन प्रतिदिन लगभग 30 लाख टन है | कुछ यूरोपीय देश और चीन पशुओं के गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट  का उपयोग ऊर्जा के उत्पादन के लिए करते हैं लेकिन भारत में इसकी पूर्ण क्षमता का उपयोग नहीं हो रहा था | ‘स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण’ के अंतर्गत अब इस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं |      
  मवेशियों के गोबर, कृषि से निकलने वाले कचरे, रसोई घर से निकलने वाला कचरा, इन सबको बायोगैस आधारित उर्जा बनाने के लिए इस्तेमाल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है | ‘गोबर धन योजना’ के तहत ग्रामीण भारत में किसानों, बहनों, भाइयों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वो गोबर और कचरे को सिर्फ waste के रूप में नहीं बल्कि आय के स्रोत के रूप में देखें | ‘गोबर धन योजना’ से ग्रामीण क्षेत्रों को कई लाभ मिलेंगे | गांव को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी | पशु-आरोग्य बेहतर होगा और उत्पादकता बढ़ेगी | बायोगैस से खाना पकाने और lighting के लिए ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी | किसानों एवं पशुपालकों को आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी |  Waste collection, transportation, बायोगैस की बिक्री आदि के लिए नई नौकरियों के अवसर मिलेंगे | ‘गोबर धन योजना’ के सुचारू व्यवस्था के लिए एक online trading platform भी बनाया जाएगा जो किसानों को खरीदारों से connect करेगा ताकि किसानों को गोबर और agriculture waste का सही दाम मिल सके | मैं उद्यमियों, विशेष रूप से ग्रामीण भारत में रह रही अपनी बहनों से आग्रह करता हूँ कि आप आगे आयें | Self Help Group बनाकर, सहकारी समितियां बनाकर इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं | मैं आपको आमंत्रित करता हूँ clean energy and green jobs के इस आन्दोलन के भागीदार बनें | अपने गाँव में waste को wealth में परिवर्तन करने और गोबर से गोबर-धन बनाने की दिशा में पहल करें | 
   मेरे प्यारे देशवासियो, आज तक हम music festival, food festival, film festival न जाने कितने-कितने प्रकार के festival के बारे में सुनते आए हैं  | लेकिन छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक अनूठा प्रयास करते हुए राज्य का पहला ‘कचरा महोत्सव’ आयोजित किया गया | रायपुर नगर निगम द्वारा आयोजित इस महोत्सव के पीछे जो उद्देश्य था वह था स्वच्छता को लेकर जागरूकता | शहर के waste का creatively use करना और garbage को re-use करने के विभिन्न तरीकों के बारे में जागरूकता पैदा करना | इस महोत्सव के दौरान तरह-तरह की activity हुई जिसमें छात्रों से लेकर बड़ों तक, हर कोई शामिल हुआ | कचरे का उपयोग करके अलग-अलग तरह की कलाकृतियाँ बनाई गईं | Waste management के सभी पहलूओं पर लोगों को शिक्षित करने के लिए workshop आयोजित किये गए | स्वच्छता के theme पर music performance हुई | Art work बनाए गए | रायपुर से प्रेरित होकर अन्य ज़िलों में भी अलग-अलग तरह के कचरा उत्सव हुए | हर किसी ने अपनी-अपनी तरफ से पहल करते हुए स्वच्छता को लेकर innovative ideas, share किये, चर्चाएं की, कविता पाठ हुए | स्वच्छता को लेकर एक उत्सव-सा माहौल तैयार हो गया | खासकर स्कूली बच्चों ने जिस तरह बढ़-चढ़ करके भाग लिया, वह अद्भुत था | Waste management और स्वच्छता के महत्व को जिस अभिनव तरीक़े से इस महोत्सव में प्रदर्शित किया गया, इसके लिए रायपुर नगर निगम, पूरे छत्तीसगढ़ की जनता और वहां की सरकार और प्रशासन को मैं ढ़ेरों बधाइयाँ देता हूँ |
    हर वर्ष 8 मार्च को ‘अन्तरराष्ट्रीय महिला-दिवस’ मनाया जाता है | देश और दुनिया में कई सारे कार्यक्रम होते हैं | इस दिन देश में ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से ऐसी महिलाओं को सत्कार भी किया जाता है जिन्होंने बीते दिनों में भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में अनुकरणीय कार्य किया हो | आज देश woman development से आगे woman-lead development की ओर बढ़ रहा है | आज हम महिला विकास से आगे महिला के नेतृत्व में विकास की बात कर रहे हैं | इस अवसर पर मुझे स्वामी विवेकानंद के वचन याद आते हैं | उन्होंने कहा था ‘the idea of perfect womanhood is perfect independence’- सवा-सौ वर्ष पहले स्वामी जी का यह विचार भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति के चिंतन को व्यक्त करता है | आज सामाजिक, आर्थिक जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं की बराबरी की भागीदारी सुनिश्चित करना यह हम सबका कर्तव्य है, यह हम सबकी जिम्मेवारी है | हम उस परंपरा का हिस्सा है, जहाँ पुरुषों की पहचान नारियों से होती थी | यशोदा-नंदन, कौशल्या-नंदन, गांधारी-पुत्र, यही पहचान होती थी किसी बेटे की | आज हमारी नारी शक्ति ने अपने कार्यों से आत्मबल और आत्मविश्वास का परिचय दिया है | स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया है | उन्होंने ख़ुद को तो आगे बढाया ही है, साथ ही देश और समाज को भी आगे बढ़ाने और एक नए मुक़ाम पर ले जाने का काम किया है | आख़िर हमारा ‘New India’ का सपना यही तो है जहाँ नारी सशक्त हो, सबल हो, देश के समग्र विकास में बराबर की भागीदार हो | पिछले दिनों मुझे एक बहुत ही बढ़िया सुझाव किसी महाशय ने दिया था | उन्होंने सुझाव दिया था कि 8 मार्च, ‘महिला दिवस’ मनाने के भाँति- भाँति के कार्यक्रम होते हैं | क्या हर गाँव-शहर में जिन्होंने 100 वर्ष पूर्ण किये हैं ? ऐसी माताओं-बहनों का सम्मान का कार्यक्रम आयोजित हो सकता है क्या ? और उसमें एक लम्बे जीवन की बातें की जा सकती हैं क्या ? मुझे विचार अच्छा लगा, आप तक पहुँचा रहा हूँ | नारी शक्ति क्या कर सकती है, आपको ढ़ेर सारे उदाहरण  मिलेंगे | अगर आप अगल-बगल में झाकेंगे तो कुछ-न-कुछ ऐसी कहानियाँ आपके जीवन को प्रेरणा देंगी | अभी-अभी झारखण्ड से मुझे एक समाचार मिला | ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के अंतर्गत झारखण्ड में लगभग 15 लाख महिलाओं ने - यह आँकड़ा छोटा नहीं है | 15 लाख महिलाओं ने संगठित होकर एक माह का स्वच्छता अभियान चलाया | 26 जनवरी, 2018 से प्रारंभ हुए इस अभियान के अंतर्गत मात्र 20 दिन में इन महिलाओं ने 1 लाख 70 हजार शौचालयों का निर्माण कर एक नई मिसाल कायम की है | इसमें करीब 1 लाख सखी मंडल सम्मिलित हैं | 14 लाख महिलाएँ, 2 हजार महिला पंचायत प्रतिनिधि, 29 हजार जल-सहिया, 10 हज़ार महिला स्वच्छाग्रही तथा 50 हजार महिला राज मिस्त्री | आप कल्पना कर सकते हैं कि कितनी बड़ी घटना है! झारखण्ड की इन महिलाओं ने दिखाया है कि नारी शक्ति, स्वच्छ भारत अभियान की एक ऐसी शक्ति है, जो सामान्य जीवन में स्वच्छता के अभियान को, स्वच्छता के संस्कार को प्रभावी ढंग से जन-सामान्य के स्वभाव में परिवर्तित करके रहेगी |
भाइयो-बहनो, अभी दो दिन पहले मैं न्यूज़ में देख रहा था कि एलीफेंटा द्वीप के तीन गाँवों में आज़ादी के 70 वर्ष बाद बिजली पहुँची है और इसे लेकर वहाँ के लोगों में कितना हर्ष और उत्साह है | आप सब भलीभाँति जानते हैं, एलीफेंटा द्वीप, मुंबई से समुद्र में दस  किलोमीटर दूर है | यह पर्यटन का एक बहुत बड़ा और आकर्षक केंद्र है | एलीफेंटा की गुफाएँ, UNESCO के World Heritage हैं | वहाँ हर दिन देश-विदेश से बहुत बड़ी मात्रा में पर्यटक आते हैं | एक महत्वपूर्ण tourist destination है | मुझे यह बात जानकर हैरानी हुई कि मुम्बई के पास होने और पर्यटन का इतना बड़ा केंद्र होने के बावजूद, आज़ादी के इतने वर्षों तक एलीफेंटा में बिजली नहीं पहुँची हुई | 70 वर्षों तक एलीफेंटा द्वीप के तीन गाँव राजबंदर, मोरबंदर और सेंतबंदर, वहाँ के लोगों की ज़िन्दगी में जो अँधेरा छाया था, अब जाकर वह अँधेरा छठा है और उनका जीवन रोशन हुआ है | मैं वहाँ के प्रशासन और जनता को बधाई देता हूँ | मुझे ख़ुशी है कि अब एलीफेंटा के गाँव और एलीफेंटा की गुफाएँ बिजली से रोशन होंगे | ये सिर्फ़ बिजली नहीं, लेकिन विकास के दौर की एक नयी शुरुआत है | देशवासियो का जीवन रोशन हो, उनके जीवन में खुशियाँ आएँ इससे बढकर संतोष और ख़ुशी का पल क्या हो सकता है |
मेरे प्यारे भाइयो-बहनो, अभी-अभी हम लोगों ने शिवरात्रि का महोत्सव मनाया | अब मार्च का महीना लहलहाते फसलों से सजे खेत, अठखेलियाँ करती गेंहूँ की सुनहरी बालियाँ और मन को पुलकित करने वाली आम के मंजर की शोभा - यही तो इस महीने की विशेषता है | लेकिन यह महीना होली के त्योंहार के लिए भी हम सभी का अत्यंत प्रिय है | दो मार्च को पूरा देश होली का उत्सव हर्षोल्लास से मनाएगा | होली में जितना महत्व रंगों का है उतना ही महत्व ‘होलिका दहन’ का भी है क्योंकि यह दिन बुराइयों को अग्नि में जलाकर नष्ट करने का दिन है | होली सारे मन-मुटाव भूल कर एक साथ मिल बैठने, एक-दूसरे के सुख-आनंद में सहभागी बनने का शुभ अवसर है और प्रेम एकता तथा भाई-चारे का सन्देश देता है | आप सभी देशवासियों को होली के रंगोत्सव की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ, रंग भरी शुभकामनाएँ | यह पर्व हमारे देशवासियों के जीवन में रंगबिरंगी खुशियों से भरा हुआ रहे - यही शुभकामना | मेरे प्यारे देशवासियो, बहुत-बहुत धन्यवाद नमस्कार |
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