Friday, 6 October 2017

Play it again, Akashvani!

It is that time of the year again! When “the hill side is dew pearled” at “mornings at seven”! Robert Browning’s Pippa’s Song is playing out in the mindscape. Yes, it is that time of the year when the long hot summer looks forward to a little respite, when the mist waits in the wings for its entry cue,  when festivals and fiestas line up to unfold their special brands of magic. And when All India Radio is all geared up for its annual date with its listeners … where the music moves out of its studios to grace a score and more of stages across the country. Studded with a galaxy of artistes. Serving up a cornucopia of music.



Yes, we are talking of the annual Akashvani Sangeet Sammelan organized simultaneously in 24 different cities across the country. The annual music festival whose rich legacy goes back to 1954 and which has built an enduring bond between artiste and listener and served both well. To preserve, propagate a heritage, to patronise the musical arts, to present and promote it to generation after generation. Akashvani has done it with elan. And devotion. In the true spirit of public service.

Let us take you back to 23 October 1954. To Sapru House, New Delhi. Where the Sammelan started with a three-day concert. Around the same time when the pandits and ustads had lost the patronage of more than 600 princes and nawabs. When there were very few institutions and patrons that could fund and organize music concerts. With this endeavour of Akashvani, the State would take over the role of princely patrons and ensure transparency and fair play by introducing a system of grading artistes.  A system was in place for music auditions.




 Today, while we mark the 64th year of this festival, we can proudly claim that the system has stood the test of time.  That most of the present day luminaries in our musical firmament still abide by it. 

While Akashvani plays on, it has also changed its beat with the times. And today we are proudly moving this system to the digital age. Along with this year’s Sangeet Sammelan on 7 October 2017, we shall launch our online music audition system.

Come, join us at the high table of music on 7 October!  24 different venues! 68 artistes! Come, feel the magic!


-          By Basudha Banerji

Sunday, 24 September 2017

‘मन की बात’ (36वीं कड़ी) प्रसारण तिथि: 24.09.2017

मेरे प्यारे देशवासियो, आप सबको नमस्कार | आकाशवाणी के माध्यम से ‘मन की बात’ करते-करते तीन वर्ष पूरे हो गए हैं | आज ये 36वाँ episode है | ‘मन की बात’ एक प्रकार से भारत की जो सकारात्मक शक्ति है, देश के कोने-कोने में जो भावनाएँ भरी पड़ी हैं, इच्छाएँ हैं, अपेक्षाएँ हैं, कहीं-कहीं शिकायत भी है - एक जन-मन में जो भाव उमड़ते रहते हैं ‘मन की बात’ ने उन सब भावों से मुझे जुड़ने का एक बड़ा अद्भुत अवसर दिया और मैंने कभी ये नहीं कहा है कि मेरे मन की बात है | ये ‘मन की बात’ देशवासियों के मन से जुड़ी हैं, उनके भाव से जुड़ी हैं, उनकी आशा-अपेक्षाओं से जुड़ी हुई हैं | और जब ‘मन की बात’ में बातें मैं बताता हूँ तो उसे देश के हर कोने से जो लोग मुझे अपनी बातें भेजते हैं, आपको तो शायद मैं बहुत कम कह पाता हूँ लेकिन मुझे तो भरपूर खज़ाना मिल जाता है | चाहे email पर हो, टेलीफोन पर हो, mygov पर हो, NarendraModiApp पर हो, इतनी बातें मेरे तक पहुँचती हैं | अधिकतम तो मुझे प्रेरणा देने वाली होती हैं | बहुत सारी, सरकार में सुधार के लिए होती हैं | कहीं व्यक्तिगत शिकायत भी होती हैं तो कहीं सामूहिक समस्या पर ध्यान आकर्षित किया जाता है | और मैं तो महीने में एक बार आधा घंटा आपका लेता हूँ, लेकिन लोग, तीसों दिन ‘मन की बात’ के ऊपर अपनी बातें पहुँचाते हैं | और उसका  परिणाम ये आया है कि सरकार में भी संवेदनशीलता, समाज के दूर-सुदूर कैसी-कैसी शक्तियाँ पड़ी हैं, उस पर उसका ध्यान जाना, ये सहज अनुभव आ रहा है | और इसलिए ‘मन की बात’ की तीन साल की ये यात्रा देशवासियों की, भावनाओं की, अनुभूति की एक यात्रा है | और शायद इतने कम समय में देश के सामान्य मानव के भावों को जानने-समझने का जो मुझे अवसर मिला है और इसके लिए मैं देशवासियों का बहुत आभारी हूँ | ‘मन की बात’ में मैंने हमेशा आचार्य विनोबा भावे की उस बात को याद रखा है | आचार्य विनोबा भावे हमेशा कहते थे ‘अ-सरकारी, असरकारी ’ | मैंने भी ‘मन की बात’ को, इस देश के जन को केंद्र में रखने का प्रयास किया है | राजनीति के रंग से उसको दूर रखा है | तत्कालीन, जो गर्मी होती है, आक्रोश होता है, उसमें भी बह जाने के बजाय, एक स्थिर मन से, आपके साथ जुड़े रहने का प्रयास किया है | मैं ज़रूर मानता हूँ, अब तीन साल के बाद social scientists, universities, reseach scholars, media experts ज़रूर इसका analysis करेंगे | plus-minus हर चीज़ को उजागर करेंगे | और मुझे विश्वास है कि ये विचार-विमर्श भविष्य ‘मन की बात’ के लिए भी अधिक उपयोगी होगा, उसमें एक नयी चेतना, नयी ऊर्जा मिलेगी | और मैंने जब एक बार ‘मन की बात’ में कही थी कि हमें भोजन करते समय चिंता करनी चाहिये कि जितनी ज़रूरत है उतना ही लें, हम उसको बर्बाद न करें | लेकिन उसके बाद मैंने देखा कि देश के हर कोने से मुझे इतनी चिट्ठियाँ आयी, अनेक सामाजिक संगठन, अनेक नवयुवक पहले से ही इस काम को कर रहे हैं | जो अन्न थाली में छोड़ दिया जाता है उसको इकट्ठा करके, उसका सदुपयोग कैसे हो इसमें काम करने वाले इतने लोग मेरे इतने ध्यान में आये, मेरे मन को इतना बड़ा संतोष हुआ, इतना आनंद हुआ |

एक बार मैंने ‘मन की बात’ में महाराष्ट्र के एक retired teacher श्रीमान् चन्द्रकान्त कुलकर्णी की बात कही थी, जो अपने pension में से, सोलह हज़ार रूपये का pension मिलता था उसमें से पाँच हज़ार रुपया वो, 51 post-dated cheque देकर के, स्वच्छता के लिये  उन्होंने दान दे दिया था | और उसके बाद तो मैंने देखा कि स्वच्छता के लिए, इस प्रकार के काम करने के लिए कितने लोग आगे आए |
एक बार मैंने हरियाणा के एक सरपंच की ‘selfie with daughter’ को देखा और मैंने ‘मन की बात’ में सबके सामने रखा | देखते ही देखते न सिर्फ़ भारत में, पूरे विश्व में ‘selfie with daughter’ एक बड़ा अभियान चल पड़ा | ये सिर्फ़ social media का मुद्दा नहीं है | हर बेटी को एक नया आत्मविश्वास, नया गर्व पैदा करने वाली ये घटना बन गयी | हर माँ-बाप को लगने लगा कि मैं अपनी बेटी के साथ selfie लूँ | हर बेटी को लगने लगा कि मेरा कोई माहात्म्य है, मेरा कोई महत्व है |

पिछले दिनों मैं भारत सरकार के tourism department के साथ बैठा था | मैंने जब tour पर जाने वाले लोगों से कहा था कि आप incredible India पर, जहाँ भी जाएँ वहाँ की फोटो भेजिये | लाखों तस्वीरें, भारत के हर कोने की, एक प्रकार से tourism क्षेत्र में काम करने वालों की एक बहुत बड़ी अमानत बन गयी | छोटी-सी घटना कितना बड़ा आन्दोलन खड़ा कर देती है, ये ‘मन की बात’ में मैंने अनुभव किया है | आज मन कर गया, क्योंकि जब सोच रहा था तीन साल हो गये, तो पिछले तीन साल की कई घटनायें मेरे मन-मंदिर में छा गयीं | देश सही दिशा में जाने के लिए हर पल अग्रसर है | देश का हर नागरिक दूसरे की भलाई के लिए, समाज की अच्छाई के लिए, देश की प्रगति के लिए, कुछ-न-कुछ करना चाहता है ये मेरे तीन साल के ‘मन की बात’ के अभियान में, मैंने देशवासियों से जाना है, समझा है, सीखा है | किसी भी देश के लिए ये सबसे बड़ी पूँजी होती है, एक बहुत बड़ी ताक़त होती है | मैं ह्रदय से देशवासियों को नमन करता हूँ |                


मैंने एक बार ‘मन की बात’ में खादी के विषय में चर्चा की थी | और खादी एक वस्त्र नहीं, एक विचार है | और मैंने देखा कि इन दिनों खादी के प्रति काफ़ी रुचि बढ़ी है और मैंने स्वाभाविक रूप से कहा था कि मैं कोई खादीधारी बनने के लिए नहीं कह रहा हूँ लेकिन भाँति-भाँति के fabric होते हैं तो एक खादी क्यों न हो ? घर में चादर हो, रूमाल हो, curtain हो | अनुभव ये आया है कि युवा-पीढ़ी में खादी का आकर्षण बढ़ गया है | खादी की बिक्री बढ़ी है और उसके कारण ग़रीब के घर में सीधा-सीधा रोज़गारी का संबंध जुड़ गया है | 2 अक्टूबर से खादी में discount दिया जाता है , काफ़ी छूट-रियायत मिलती है |  मैं फिर एक बार आग्रह करूँगा, खादी का जो अभियान चला है उसको हम और आगे चलायें, और बढ़ायें | खादी खरीद करके ग़रीब के घर में दिवाली का दीया जलायें, इस भाव को लेकर के हम काम करें | हमारे देश के ग़रीब को इस कार्य से एक ताक़त मिलेगी और हमें करना चाहिए | और इस खादी के प्रति रुचि बढ़ने के कारण खादी क्षेत्र में काम करने वालो में, भारत सरकार में खादी से संबंधित लोगों में एक नये तरीक़े से सोचने का उत्साह भी बढ़ा है | नई technology कैसे लाएँ, उत्पादन क्षमता कैसे बढ़ाएँ, solar-हथकरघे कैसे ले आएँ? पुरानी जो विरासत थी जो बिलकुल ही 20-20, 25-25, 30-30 साल से बंद पड़ी थीं उसको पुनर्जीवित कैसे किया जाए |
उत्तर प्रदेश में, वाराणसी सेवापुर में, अब सेवापुरी का खादी आश्रम 26 साल से बंद पड़ा था लेकिन आज पुनर्जीवित हो गया | अनेक प्रकार की प्रवर्तियों को जोड़ा गया | अनेक लोगों को रोज़गार के नये अवसर पैदा किये | कश्मीर में पम्पोर में खादी एवं ग्रामोद्योग ने बंद पड़े अपने प्रशिक्षण केंद्र को फिर से शुरू किया और कश्मीर के पास तो इस क्षेत्र में देने के लिए बहुत कुछ है | अब ये प्रशिक्षण केंद्र फिर से शुरू होने के कारण नई पीढ़ी को आधुनिक रूप से निर्माण कार्य करने में, बुनने में, नयी चीज़ें बनाने में एक मदद मिलेगी और मुझे अच्छा लग रहा है कि जब बड़े-बड़े Corporate House भी दिवाली में जब gift देते हैं तो इन  दिनों खादी की चीज़े देना शुरू किये हैं | लोग भी एक दूसरे को gift के रूप में खादी की चीज़े देना शुरू किये हैं | एक सहज़ रूप से, चीज़ कैसे आगे बढ़ती है ये हम सब अनुभव करते हैं |
     मेरे प्यारे देशवासियो, पिछले महीने ‘मन की बात’ में ही हम सब ने एक संकल्प किया था और हमने तय किया था कि गाँधी-जयंती से पहले 15 दिन देश-भर में स्वच्छता का उत्सव मनायेंगे | स्वच्छता से जन-मन को जोड़ेंगे | हमारे आदरणीय राष्ट्रपति जी ने इस कार्य का आरंभ किया और देश जुड़ गया | अबाल-वृद्ध, पुरुष हो, स्त्री हो, शहर हो, गाँव हो, हर कोई आज इस स्वच्छता-अभियान का हिस्सा बन गया है | और जब मैं कहता हूँ ‘संकल्प से सिद्धि’, ये स्वच्छता-अभियान एक संकल्प-सिद्धि की ओर कैसे आगे बढ़ रहा है हम अपनी आँखों के सामने देख रहे हैं | हर कोई इसको स्वीकारता है, सहयोग करता है और साकार करने के लिए कोई न कोई योगदान देता है | मैं आदरणीय राष्ट्रपति जी का तो आभार मानता हूँ लेकिन साथ-साथ देश के हर वर्ग ने इसको अपना काम माना है | हर कोई इसके साथ जुड़ गया है | चाहे खेल- जगत के लोग हों, सिने-जगत के लोग हों, academicians हों, स्कूल हों, कॉलेज हों, university हों, किसान हों, मज़दूर हों, अफ़सर हों, बाबू हों, पुलिस हों, फौज के जवान हों - हर कोई इसके साथ जुड़ गया है | सार्वजनिक स्थानों पर एक दबाव भी पैदा हुआ है कि अब सार्वजनिक स्थान गंदे हों तो लोग टोकते हैं, वहाँ काम करने वालों को भी एक दबाव महसूस होने लगा है | मैं इसे अच्छा मानता हूँ और मेरे लिए ख़ुशी है कि ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान’ के सिर्फ पहले चार दिन में ही करीब-करीब 75 लाख से ज़्यादा लोग, 40 हज़ार से ज़्यादा initiative लेकर के गतिविधियों में जुड़ गए और कुछ तो लोग मैंने देखा है कि लगातार काम कर रहे हैं, परिणाम लाकर के रहने का फैसला ले करके काम कर रहे हैं | इस बार एक और भी चीज़ देखी - एक तो होता है कि हम कहीं स्वच्छता करें, दूसरा होता है हम जागरूक रह करके गन्दगी न करें, लेकिन स्वच्छता को अगर स्वभाव बनाना है तो एक वैचारिक आंदोलन भी ज़रुरी होता है | इस बार ‘स्वच्छता ही सेवा’ के साथ कई प्रतियोगितायें हुईं | ढाई करोड़ से ज़्यादा बच्चों ने स्वच्छता के निबंध-स्पर्धा में भाग लिया | हज़ारों बच्चों ने paintings बनायी | अपनी-अपनी कल्पना से स्वच्छता को लेकर के चित्र बनाये | बहुत से लोगों ने कवितायें बनायी और इन दिनों तो मैं social media पर ऐसे जो हमारे नन्हें साथियों ने, छोटे-छोटे बालकों ने चित्र भेजे हैं वो मैं post भी करता हूँ, उनका गौरवगान करता हूँ | जहाँ तक स्वच्छता की बात आती है तो मैं media के लोगों का आभार मानना कभी भूलता नहीं हूँ | इस आंदोलन को उन्होंने बहुत पवित्रतापूर्वक आगे बढ़ाया है | अपने-अपने तरीक़े से, वे जुड़ गए हैं और एक सकारात्मक वातावरण बनाने में उन्होंने बहुत बड़ा योगदान दिया है और आज भी वो अपने-अपने तरीक़े से स्वच्छता के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं | हमारे देश का electronic media, हमारे देश का print media देश की कितनी बड़ी सेवा कर सकता है ये ‘स्वच्छता ही सेवा’ आंदोलन में हम देख पाते हैं | अभी कुछ दिन पहले मुझे किसी ने ध्यान आकर्षित किया श्रीनगर के 18 साल के नौजवान बिलाल डार के संबंध में | और आपको जान करके ख़ुशी होगी कि श्रीनगर नगर निगम ने बिलाल डार को स्वच्छता के लिए अपना Brand Ambassador बनाया है और जब Brand Ambassador की बात आती है तो आपको लगता होगा कि शायद वो सिने-कलाकार होगा, शायद वो खेल-जगत का हीरो होगा, जी नहीं | बिलाल डार स्वयं 12-13 साल की अपनी उम्र से, पिछले 5-6 साल से स्वच्छता में लग गया है | एशिया की सबसे बड़ी झील श्रीनगर के पास  वहाँ प्लास्टिक हो, पॉलिथीन हो, used bottle हो, कूड़ा-कचरा हो, बस वो साफ़ करता रहता है | उसमें से कुछ कमाई भी कर लेता है | क्योंकि उसके पिता जी की बहुत छोटी आयु में कैंसर में मृत्यु हो गई  लेकिन उसने अपना जीवन आजीविका के साथ-साथ स्वच्छता के साथ जोड़ दिया | एक अनुमान है कि बिलाल ने सालाना 12 हज़ार किलो से ज़्यादा कूड़ा-कचरा साफ़ किया है | श्रीनगर नगर निगम को भी मैं बधाई देता हूँ कि स्वच्छता के प्रति इस पहल के लिए और Ambassador के लिए उनकी इस कल्पना के लिए, क्योंकि श्रीनगर एक tourist destination है और हिन्दुस्तान का हर नागरिक श्रीनगर जाने का मन करता है उसका, और वहाँ सफ़ाई को इतना बल मिले ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है | और मुझे ख़ुशी है कि उन्होंने बिलाल को सिर्फ Brand Ambassador बनाया ऐसा नहीं है, सफ़ाई करने वाले बिलाल उसको निगम ने इस बार गाड़ी दी है, uniform दिया है और वो अन्य इलाक़ों में भी जाकर के लोगों को स्वच्छता के लिए शिक्षित करता है, प्रेरित करता है और परिणाम लाने तक पीछे लगा रहता है | बिलाल डार, आयु छोटी है लेकिन स्वच्छता में रुचि रखने वाले हर किसी के लिए प्रेरणा का कारण है | मैं बिलाल डार को बहुत बधाई देता हूँ |

मेरे प्यारे देशवासियो, इस बात को हमें स्वीकार करना होगा कि भावी इतिहास, इतिहास की कोख में जन्म लेता है और जब इतिहास की बात आती है तो महापुरुष याद आना बहुत स्वाभाविक है | ये अक्तूबर महीना हमारे इतने सारे महापुरुषों को स्मरण करने का महीना है | महात्मा गाँधी से लेकर के सरदार पटेल तक इसी अक्तूबर में इतने महापुरुष हमारे सामने हैं कि जिन्होंने 20वीं सदी और 21वीं सदी के लिए हम लोगों को दिशा दी, हमारा नेतृत्व किया, हमारा मार्गदर्शन किया और देश के लिए उन्होंने बहुत कष्ट झेले | दो अक्तूबर को महात्मा गाँधी और लाल बहादुर शास्त्री जी की जन्म जयंती है तो 11 अक्तूबर को जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख की जन्म-जयंती है और 25 सितम्बर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्म-जयंती है | नानाजी और दीनदयाल जी की तो ये शताब्दी का भी वर्ष है | और इन सभी महापुरुषों का एक केंद्र-बिंदु क्या था? एक बात common थी और वो देश के लिए जीना, देश के लिए कुछ करना और मात्र उपदेश नहीं, अपने जीवन के द्वारा करके दिखाना | गाँधी जी, जयप्रकाश जी, दीनदयाल जी ये ऐसे महापुरुष हैं जो सत्ता के गलियारों से कोसो दूर रहे हैं, लेकिन जन-जीवन के साथ पल-पल जीते रहे, जूझते रहे और ‘सर्वजन हिताय–सर्वजन सुखाय’, कुछ-न-कुछ करते रहे | नानाजी देशमुख राजनीतिक जीवन को छोड़ करके ग्रामोदय में लग गए थे और जब आज उनका शताब्दी-वर्ष मनाते हैं तो उनके ग्रामोदय के काम के प्रति आदर होना बहुत स्वाभाविकहै |
भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्रीमान अब्दुल कलाम जी जब नौजवानों से बात करते थे तो हमेशा नानाजी देशमुख के ग्रामीण विकास की बातें  किया करते थे | बड़े आदर से उल्लेख करते थे और वो स्वयं भी नानाजी के इस काम को देखने के लिए गाँव में गए थे |
दीनदयाल उपाध्याय जी जैसे महात्मा गाँधी समाज के आखिरी छोर में बैठे हुए इंसान की बात करते थे | दीनदयाल जी भी समाज के आखिरी छोर पर बैठे हुए ग़रीब, पीड़ित, शोषित, वंचित की ही और उसके जीवन में बदलाव लाने की - शिक्षा के द्वारा, रोज़गार के द्वारा किस प्रकार से बदलाव लाया जाये, इसकी चर्चा करते थे | इन सभी महापुरुषों को स्मरण करना ये उनके प्रति उपकार नहीं है , ये महापुरुषों का स्मरण इसलिए करते हैं कि हमें आगे का रास्ता मिलता रहे, आगे की दिशा मिलती रहे |
अगले ‘मन की बात’ में, मैं जरुर सरदार वल्लभ भाई पटेल के विषय में कहूँगा, लेकिन 31 अक्तूबर पूरे देश में Run for Unity ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ |  देश के हर शहर में, हर नगर में बहुत बड़ी मात्रा में Run for Unity के कार्यक्रम होने चाहिए और मौसम भी ऐसा है कि  दौड़ने का मज़ा  आता है - सरदार साहब जैसी लौह-शक्ति पाने के लिए ये भी तो ज़रुरी है | और सरदार साहब ने देश को एक किया था | हमने भी एकता के लिए दौड़ करके एकता के मंत्र को आगे बढ़ाना चाहिए |
हम लोग बहुत स्वाभाविक रूप से कहते हैं - विविधता में एकता, भारत की विशेषता | विविधता का हम गौरव करते हैं लेकिन क्या कभी आपने इस विविधता को अनुभव करने का प्रयास किया है क्या? मैं बार-बार हिंदुस्तान के मेरे देशवासियों से कहना चाहूँगा और ख़ास करके मेरी युवा-पीढ़ी को कहना चाहूँगा कि हम एक जागृत-अवस्था में हैं | इस भारत की विविधताओं का अनुभव करें, उसको स्पर्श करें, उसकी महक को अनुभव करें | आप देखिये, आपके भीतर के व्यक्तित्व के विकास के लिए भी हमारे देश की ये विविधतायें एक बहुत बड़ी पाठशाला का काम करती है | Vacation है, दिवाली के दिन है, हमारे देश में चारों तरफ कहीं-न-कहीं जाने का स्वभाव बना हुआ है ,लोग जाते हैं tourist के नाते और बहुत स्वाभाविक है | लेकिन कभी-कभी चिंता होती है कि हम अपने देश को तो देखते नहीं हैं, देश की विविधताओं को जानते नहीं, समझते नहीं, लेकिन चका-चौंध के प्रभाव में आकर के विदेशों में ही tour करना पसंद करना शुरू किये हैं | आप दुनिया में जायें मुझे कोई एतराज़ नहीं है, लेकिन कभी अपने घर को भी तो देखें ! उत्तर-भारत के व्यक्ति को पता नहीं होगा कि दक्षिण-भारत में क्या है? पश्चिम-भारत के व्यक्ति को पता नहीं होगा कि पूर्व-भारत में क्या है? हमारा देश कितनी विविधताओं से भरा हुआ है |
महात्मा गाँधी, लोकमान्य तिलक, स्वामी विवेकानंद, हमारे पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी अगर उनकी बातों में देखोगे तो एक बार बात आती है कि जब उन्होंने भारत-भ्रमण किया तब उनको भारत को देखने-समझने में और उसके लिए जीने-मरने के लिए एक नई प्रेरणा मिली | इन सभी महापुरुषों ने भारत का व्यापक भ्रमण किया | अपने कार्य के प्रारंभ में उन्होंने भारत को जानने, समझने का प्रयास किया | भारत को अपने आप में जीने की कोशिश की | क्या हम, हमारे देश के भिन्न-भिन्न राज्यों को, भिन्न-भिन्न समाजों को, समूहों को, उनके रीति-रिवाजों को, उनकी परम्परा को, उनके पहर्वेश (पहनावे) को, उनके खान-पान को, उनकी मान्यताओं को एक विद्यार्थी के रूप में सीखने का, समझने का, जीने का प्रयास कर सकते हैं ?
Tourism में value addition तभी होगा कि जब हम सिर्फ़ मुलाक़ाती  नहीं, हम एक विद्यार्थी के तौर पर उसका पाना-समझना-बनने का प्रयास करें | मेरा स्वयं का अनुभव है मुझे हिंदुस्तान के पाँच सौ  से अधिक district में जाने का मौक़ा मिला होगा | साढ़े चार सौ  से अधिक district तो ऐसे होंगे जहाँ मुझे रात्रि-मुक़ाम का अवसर मिला है और आज जब मैं भारत में इस दायित्व को संभाल रहा हूँ तो मेरे उस भ्रमण का अनुभव मुझे बहुत काम आता है | चीजों को समझने में मुझे बहुत सुविधा मिलती है | आपसे भी मेरा आग्रह है कि आप इस विशाल भारत को “विविधता में एकता” सिर्फ़ नारा नहीं, हमारी अपार-शक्ति का ये भंडार है, इसको अनुभव कीजिये | ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का सपना इसमें निहित है | खान-पान की कितनी varieties हैं ! पूरे जीवन भर हर दिन एक-एक नई variety अगर खाते रहें तो भी repetition नहीं होगा | अब ये हमारी tourism की बड़ी ताक़त है | मैं आग्रह करूँगा कि इस छुट्टियों में आप सिर्फ घर के बाहर जाएँ ऐसा नहीं, change के लिए निकल पड़ें ऐसा नहीं - कुछ जानने- समझने-पाने के इरादे से निकलिए | भारत को अपने भीतर आत्मसात् कीजिये | कोटि-कोटि जनों की विविधताओं को भीतर आत्मसात् कीजिये | इन अनुभवों से आपका जीवन समृद्ध हो जायेगा | आपकी सोच का दायरा विशाल हो जायेगा | और अनुभव से बड़ा शिक्षक कौन होता है ! सामान्य तौर पर अक्तूबर से मार्च तक का समय ज्यादातर पर्यटन का रहता है | लोग जाते हैं | मुझे विश्वास है कि इस बार भी अगर आप जायेंगे तो मेरे उस अभियान को और आगे बढ़ायेंगे | आप जहाँ भी जाएँ अपने अनुभवों को share कीजिये, तस्वीरों को share कीजिये | #incredibleindia ( हैश टैग incredibleindia) इस पर आप फ़ोटो ज़रुर भेजिए | वहाँ के लोगों से मिलना हो जाये तो उनकी भी तस्वीर भेजिए | सिर्फ़ इमारतों की नहीं, सिर्फ़ प्राकृतिक सौन्दर्य की नहीं ,वहाँ के जन-जीवन की कुछ बातें लिखिए | आपकी यात्रा के अच्छे निबंध लिखिए | Mygov पर भेजिए, NarendraModiApp पर भेजिये | मेरे मन में एक विचार आता है कि हम भारत के tourism को बढ़ावा देने के लिए क्या आप अपने राज्य के सात उत्तम से उत्तम tourist destination क्या हो सकते हैं - हर हिन्दुस्तानी को आपके राज्य के उन सात चीज़ों के विषय में जानना चाहिये | हो सके तो उन सात स्थानों पर जाना चाहिये | आप उसके विषय में कोई जानकारी दे सकते हैं क्या ? NarendraModiApp पर उसको रख सकते हैं क्या ? #IncredibleIndia (हैश टैग incredibleindia)  पर रख सकते हैं क्या ? आप देखिये, एक राज्य के सब लोग ऐसा बतायेंगे तो मैं सरकार में कहूँगा कि वो उसको scrutiny करे और common कौन-सी सात चीज़े हर राज्य से आई हैं उस पर वो प्रचार-साहित्य तैयार करें | यानि एक प्रकार से जनता के अभिप्रायों से tourist destination का बढ़ावा कैसे हो ? उसी प्रकार से आपने जो चीजें देखी हैं देशभर में, उसमें से सात आपको जो अच्छे से अच्छी लगी हैं , आप चाहते हैं कि किसी-न-किसी ने तो इसको देखनी चाहिये, जाना चाहिये, उसके विषय में जानकारी पानी चाहिये तो आप आपकी पसंद की सात ऐसे स्थान का भी MyGov पर, NarendraModiApp पर ज़रूर भेजिये | भारत सरकार उस पर काम करेगी | ऐसे उत्तम destination जो होंगे उसके लिए film बनाना, video बनाना, प्रचार-साहित्य तैयार करना, उसको बढ़ावा देना - आपके द्वारा चुनी हुई चीज़ों को सरकार स्वीकार करेगी | आइये, मेरे साथ जुड़िये |  इस अक्तूबर महीने से मार्च महीने तक का समय का उपयोग देश के tourism  को बढ़ाने में आप भी एक बहुत बड़े catalyst agent बन सकते हैं | मैं आपको निमंत्रण देता हूँ |


     मेरे प्यारे देशवासियो, एक इन्सान के नाते बहुत-सी चीजें मुझे भी छू जाती हैं | मेरे दिल को आंदोलित कर जाती हैं | मेरे मन पर गहरा प्रभाव छोड़ जाती हैं | आख़िर मैं भी तो आप ही की तरह एक इन्सान हूँ | पिछले दिनों एक घटना है जो शायद आपके भी ध्यान में आयी होगी - महिला-शक्ति और देशभक्ति की अनूठी मिसाल हम देशवासियों ने देखी है | Indian Army को लेफ्टिनेंट स्वाति और निधि के रूप में दो वीरांगनाएँ मिली हैं और वे असामान्य वीरांगनाएँ है | असामान्य इसलिए हैं कि स्वाति और निधि माँ-भारती की सेवा करते-करते उनके पति शहीद हो गए थे | हम कल्पना कर सकते हैं कि इस छोटी आयु में जब संसार उजड़ जाये तो मन:स्थिति कैसे होगी ? लेकिन शहीद कर्नल संतोष महादिक की पत्नी स्वाति महादिक इस कठिन परिस्थितियों का मुक़ाबला करते हुए उसने मन में ठान ली | और वे  भारत की सेना में भर्ती हो गयीं | 11 महीने  तक उसने कड़ी मेहनत करके प्रशिक्षण हासिल किया  और अपने पति के सपनों को पूरा करने के लिए उसने अपनी ज़िन्दगी झोंक दी |  उसी प्रकार से निधि दुबे, उनके पति मुकेश दुबे सेना में नायक का काम करते थे और मातृ-भूमि के लिए शहीद हो गए तो उनकी पत्नी निधि ने मन में ठान ली और वे भी सेना में भर्ती हो गयीं | हर देशवासी को हमारी इस मातृ-शक्ति पर, हमारी इन वीरांगनाओं के प्रति आदर होना बहुत स्वाभाविक है | मैं इन दोनों बहनों को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूँ | उन्होंने देश के कोटि-कोटि जनों के लिए एक नयी प्रेरणा, एक नयी चेतना जगायी है | उन दोनों बहनों को बहुत-बहुत बधाई |
    मेरे प्यारे देशवासियो, नवरात्रि का उत्सव और दिवाली के बीच हमारे देश की युवा पीढ़ी के लिए  एक बहुत बड़ा अवसर भी है| FIFA under-17 का वर्ल्ड-कप हमारे यहाँ हो रहा है | मुझे विश्वास है कि चारों तरफ़ फुटबाल की गूँज सुनाई देगी | हर पीढ़ी की फुटबाल में रूचि बढ़ेगी | हिन्दुस्तान का कोई स्कूल - कॉलेज का मैदान ऐसा न हो कि जहाँ पर हमारे नौजवान खेलते हुए नज़र न आयें | आइये, पूरा विश्व जब भारत की धरती पर खेलने के लिए आ रहा है, हम भी खेल को अपने जीवन का हिस्सा बनायें |
     मेरे प्यारे देशवासियो, नवरात्रि का पर्व चल रहा है | माँ दुर्गा की पूजा का अवसर है | पूरा माहौल पावन पवित्र सुगंध से व्याप्त है | चारों तरफ़ एक आध्यात्मिकता का वातावरण, उत्सव का वातावरण, भक्ति का वातावरण और ये सब कुछ शक्ति की साधना का पर्व माना जाता है | ये शारदीय-नवरात्रि के रूप में जाना जाता है | और यहीं से शरद-ऋतु का आरंभ होता है | नवरात्रि के इस पावन-पर्व पर मैं देशवासियों को अनेक-अनेक शुभकामनायें देता हूँ और माँ-शक्ति से प्रार्थना करता हूँ कि देश के सामान्य-मानव के जीवन की आशा-आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए हमारा देश नई ऊँचाइयों को प्राप्त करे | हर चुनौतियों का सामना करने का सामर्थ्य देश को आए | देश तेज़ गति से आगे बढ़े और दो हज़ार बाईस (2022) भारत की आज़ादी के 75 साल- आज़ादी के दीवानों के सपनों को पूरा करने का प्रयास, सवा-सौ करोड़ देशवासियों का संकल्प, अथाह मेहनत, अथाह पुरुषार्थ और संकल्प को साकार करने के लिए पांच साल का road map बना करके हम चल पड़े और माँ शक्ति हमे आशीर्वाद दे | आप सब को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ | उत्सव भी मनायें, उत्साह भी बढ़ायें |
 बहुत-बहुत धन्यवाद |
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Sunday, 27 August 2017

‘मन की बात’ (प्रसारण तिथि: 27.08.2017)

मेरे प्यारे देशवासियो, सादर नमस्कार| एक तरफ देश उत्सवों में डूबा हुआ है  और दूसरी तरफ से हिन्दुस्तान के किसी कोने से जब हिंसा की खबरें आती हैं तो देश को चिंता होना स्वाभाविक है| ये हमारा देश बुद्ध और गांधी का देश  है,  देश की एकता के लिए जी-जान लगा देने वाले सरदार पटेल का देश है| सदियों से हमारे पूर्वजों  ने  सार्वजनिक जीवन-मूल्यों को, अहिंसा को, समादर को स्वीकार किया हुआ है,  हमारी ज़हन में भरा हुआ है |  अहिंसा परमो धर्म:, ये हम बचपन से सुनते आये हैं, कहते आये हैं |  मैंने लाल किले से भी कहा था कि आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी, चाहे वो सांप्रदायिक आस्था हो, चाहे वो राजनैतिक विचार धाराओं के प्रति आस्था हो, चाहे वो व्यक्ति के प्रति आस्था हो, चाहे वो परम्पराओं के प्रति आस्था हो, आस्था के नाम पर, कानून हाथ में लेने का किसी को अधिकार नहीं है| डॉ बाबा साहब आंबेडकर ने हमें जो संविधान दिया है उसमे हर व्यक्ति को न्याय पाने की हर प्रकार की व्यवस्था है| मैं देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूँ, कानून हाथ में लेने वाले, हिंसा के राह पर दमन करने वाले किसी को भी, चाहे वो व्यक्ति हो या समूह हो, न ये देश कभी बर्दाश्त करेगा और न ही कोई सरकार बर्दाश्त करेगी | हर किसी को कानून के सामने झुकना होगा, कानून ज़बाबदेही तय करेगा और दोषियों को सज़ा दे के रहेगा |
मेरे प्यारे देशवासियो, हमारा देश विविधताओं से भरा हुआ है और ये विविधताएँ खान-पान, रहन-सहन, पहनाव वहाँ तक सीमित नहीं है | जीवन के हर व्यवहार में हमें विविधताएँ नजर आती हैं | यहाँ तक कि हमारे त्योहार भी विविधताओं से भरे हुए हैं और हज़ारों साल पुरानी हमारी सांस्कृतिक विरासत होने के कारण सांस्कृतिक  परम्पराएँ देखें, सामाजिक परम्पराएँ देखें, ऐतिहासिक घटनायें देखें तो शायद ही 365 दिन में कोई दिन बचता होगा जबकि हमारे यहाँ कोई त्योहार से न जुड़ा हुआ हो | अब ये भी आपने देखा होगा कि हमारे सारे त्योहार, प्रकृति के समय पत्रक के अनुसार चलते हैं | प्रकृति के साथ सीधा-सीधा संबंध आता है | हमारे बहुत सारे त्योहार तो सीधे-सीधे किसान से जुड़े हुए होते हैं, मछुआरों से जुड़े हुए होते हैं |
आज मैं त्योहारों की बात कर रहा हूँ तो सबसे पहले मैं आप सबको मिच्छामि दुक्कड़म कहना चाहूँगा | जैन समाज में कल संवत्सरी का पर्व मनाया गया | जैन समाज में भाद्र मास में पर्युषण पर्व मनाया जाता है | पर्युषण पर्व के आख़िरी दिन संवत्सरी का दिन होता है | ये सचमुच में अपने आप में एक अद्भुत परम्परा है | संवत्सरी का पर्व क्षमा, अहिंसा और मैत्री का प्रतीक है | इसे एक प्रकार से क्षमा-वाणी पर्व भी कहा जाता है और इस दिन एक दूसरे को मिच्छामि दुक्कड़म कहने की परंपरा है | वैसे भी हमारे शास्त्रों में ‘क्षमा वीरस्य भूषणम्’ यानि क्षमा वीरों का भूषण है | क्षमा करने वाला वीर होता है | ये चर्चा तो हम सुनते ही आए हैं और महात्मा गाँधी तो हमेशा कहते थे - क्षमा करना तो ताकतवर व्यक्ति की विशेषता होती है |
शेक्सपियर ने अपने नाटक ‘The Merchant of Venice’ में क्षमा भाव के महत्त्व को बताते हुए लिखा था – “Mercy is twice blest, It blesseth him that gives and him that takes” अर्थात् क्षमा करने वाला और जिसे क्षमा किया गया, दोनों को भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है|
मेरे प्यारे देशवासियो, इन दिनों हिन्दुस्तान के हर कोने में गणेश चतुर्थी की धूम मची हुई है और जब गणेश चतुर्थी की बात आती है तो सार्वजनिक-गणेशोत्सव की बात स्वाभाविक है | बालगंगाधर लोकमान्य तिलक ने 125 साल पूर्व इस परंपरा को जन्म दिया और पिछले 125 साल आज़ादी के पहले वो आज़ादी के आन्दोलन का प्रतीक बन गए थे | और आज़ादी के बाद वे समाज-शिक्षा, सामाजिक-चेतना जगाने के प्रतीक बन गये हैं | गणेश चतुर्थी का पर्व 10 दिनों तक चलता है | इस महापर्व को एकता, समता और शुचिता का प्रतीक कहा जाता है | सभी देशवासियों को गणेशोत्सव की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ |
अभी केरल में ‘ओणम’ का त्योहार मनाया जा रहा है | भारत के रंग-बिरंगे त्योहारों में से एक ‘ओणम’ केरल का एक प्रमुख त्योहार है | यह पर्व अपने सामाजिक और सांस्कृतिक महत्त्व के लिए जाना जाता है | ओणम का पर्व, केरल की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करता है | यह पर्व समाज में प्रेम और सौहार्द का सन्देश देने के साथ-साथ लोगों के मन में एक नयी उमंग, नयी आशा, नया विश्वास जागृत करता है | और अब तो हमारे ये त्योहार भी, tourism के आकर्षण का भी कारण बनते जा रहे हैं | और मैं तो देशवासियों से कहूँगा कि जैसे गुजरात में नवरात्रि का उत्सव या बंगाल में दुर्गा उत्सव - एक प्रकार से tourism का आकर्षण बन चुके हैं | हमारे और त्योहार भी, विदेशियों को आकर्षित करने के लिये एक अवसर हैं | उस दिशा में हम क्या कर सकते हैं, सोचना चाहिये |
इन त्योहारों की श्रृंखला में कुछ ही दिन बाद देश भर में ‘ईद-उल-जुहा’ का पर्व भी मनाया जाएगा | सभी देशवासियों को ‘ईद-उल-जुहा’ की बहुत-बहुत बधाइयाँ, बहुत शुभकामनाएँ | त्योहार हमारे लिए आस्था और विश्वास के प्रतीक तो हैं ही, हमें नये भारत में त्योहारों को स्वच्छता का भी प्रतीक बनाना है | पारिवारिक जीवन में तो त्योहार और स्वच्छता जुड़े हुए हैं | त्योहार की तैयारी का मतलब है - साफ़-सफाई | ये हमारे लिए कोई नयी चीज़ नहीं है लेकिन ये सामाजिक स्वभाव बनाना भी ज़रूरी है | सार्वजनिक रूप से स्वच्छता का आग्रह सिर्फ़ घर में नहीं, हमारे पूरे गाँव में, पूरे नगर में, पूरे शहर में, हमारे राज्य में, हमारे देश में – स्वच्छता, ये त्योहारों के साथ एक अटूट हिस्सा बनना ही चाहिये |
    मेरे प्यारे देशवासियो, आधुनिक होने की परिभाषाएँ बदलती चली जा रही हैं | इन दिनों एक नया dimension, एक नया parameter, आप कितने संस्कारी हो, कितने आधुनिक हो, आपकी thought-process कितनी modern है, ये सब जानने में एक तराजू भी काम में आने लगा है और वो है environment के प्रति आप कितने सजग हैं | आपके अपनी गतिविधियों में eco-friendly, environment-friendly व्यवहार है कि उसके खिलाफ़ है | समाज में अगर उसके ख़िलाफ़ है तो आज बुरा माना जाता है | और उसी का परिणाम आज मैं देख रहा हूँ कि इन दिनों ये गणेशोत्सव में भी eco-friendly गणपति, मानो एक बड़ा अभियान खड़ा हो गया है | अगर आप You Tube पर जा करके देखेंगे, हर घर में बच्चे गणेश जी बना रहे हैं, मिट्टी ला करके गणेश जी बना रहे हैं | उसमें रंग पुताई कर रहे हैं | कोई vegetable के colour लगा रहा है, कोई कागज़ के टुकड़े चिपका रहा है | भांति-भांति के प्रयोग हर परिवार में हो रहे हैं | एक प्रकार से environment consciousness का इतना बड़ा व्यापक प्रशिक्षण इस गणेशोत्सव में देखने को मिला है, शायद ही पहले कभी मिला हो | Media house भी बहुत बड़ी मात्रा में eco friendly गणेश की मूर्तियों के लिए लोगों को प्रशिक्षित कर रहे हैं, प्रेरित कर रहे हैं, guide कर रहे हैं | देखिए कितना बड़ा बदलाव आया है और ये सुखद बदलाव है | और जैसा मैंने कहा हमारा देश, करोड़ों - करोड़ों तेजस्वी दिमागों से भी भरा हुआ है | और बड़ा अच्छा लगता है जब कोई नये-नये innovation जानते हैं | मुझे किसी ने बताया कि कोई एक सज्जन हैं जो स्वयं engineer हैं, उन्होंने एक विशिष्ट प्रकार से मिट्टी इकट्ठी करके, उसका combination करके, गणेश जी बनाने की training लोगों की और वो एक छोटी से बाल्टी में, पानी में गणेश विसर्जन होता है तो उसी में रखते हैं तो पानी में तुरंत dilute हो जाती है | और उन्होंने यहाँ पर रुके नहीं हैं उसमें एक तुलसी का पौधा बो दिया और पौधे बो दिए | तीन वर्ष पूर्व जब स्वच्छता का अभियान प्रारंभ किया था, 2 अक्टूबर को उसको तीन साल हो जायेंगे | और, उसके सकारात्मक परिणाम नज़र आ रहे हैं | शौचालयों की coverage 39% से करीब-करीब 67% पहुँची हैं | 2 लाख 30 हज़ार से भी ज्यादा गाँव, खुले में शौच से अपने आपको मुक्त घोषित कर चुके हैं |

          पिछले दिनों गुजरात में भयंकर बाढ़ आई | काफ़ी लोग अपनी जान गंवा बैठे लेकिन बाढ़ के बाद जब पानी कम हुआ तो हर जगह इतनी गन्दगी फ़ैल गई थी | ऐसे समय में गुजरात के बनासकांठा ज़िले के धानेरा में, जमीयत उलेमा–ए–हिन्द के कार्यकर्ताओं ने बाढ़ - प्रभावित 22 मंदिरों एवं 3 मस्जिदों की चरणबद्ध तरीक़े से साफ़-सफ़ाई की | ख़ुद का पसीना बहाया, सब लोग निकल पड़े | स्वच्छता के लिए एकता का उत्तम उदाहरण, हर किसी को प्रेरणा देने वाला ऐसा उदाहरण, जमीयत उलेमा–ए–हिन्द के सभी कार्यकर्ताओं ने दिया | स्वच्छता के लिए समर्पण भाव से किया गया प्रयास, ये अगर हमारा स्थायी स्वभाव बन जाए तो हमारा देश कहाँ से कहाँ पहुँच सकता है |

    मेरे प्यारे देशवासियो, मैं आप सभी से एक आह्वान करता हूँ कि एक बार फिर 2 अक्टूबर गाँधी जयंती से 15-20 दिन पहले से ही ‘स्वच्छता ही सेवा’ - जैसे पहले कहते थे ‘जल सेवा यही प्रभु सेवा’, ‘स्वच्छता ही सेवा’ की एक मुहिम चलायें | पूरे देश में स्वच्छता के लिए माहौल बनाएं | जैसा अवसर मिले, जहाँ भी अवसर मिले, हम अवसर ढूंढें | लेकिन हम सभी जुड़ें | इसे एक प्रकार से दिवाली की तैयारी मान लें, इसे एक प्रकार से नवरात्र की तैयारी मान लें, दुर्गा पूजा की तैयारी मान लें | श्रमदान करें | छुट्टी के दिन या रविवार को इकठ्ठा हो कर एक-साथ काम करें | आस-पड़ोस की बस्ती में जायें, नज़दीक के गाँव में जायें, लेकिन एक आन्दोलन के रूप में करें | मैं सभी NGOs को, स्कूलों को, colleges को, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक नेतृत्व को, सरकार के अफसरों को, कलेक्टरों को, सरपंचों को हर किसी से आग्रह करता हूँ कि 2 अक्टूबर महात्मा गाँधी की जन्म-जयंती के पहले ही, 15 दिन, हम एक ऐसी स्वच्छता का वातावरण बनाएं, ऐसा स्वच्छता खड़ी कर दें कि 2 अक्टूबर सचमुच में गाँधी के सपनों वाली 2 अक्टूबर हो जाए | पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय, MyGov.in पर एक section बनाया है जहाँ शौचालय निर्माण के बाद आप अपना नाम और उस परिवार का नाम प्रविष्ट कर सकते हैं, जिसकी आपने मदद की है | मेरे social media के मित्र कुछ रचनात्मक अभियान चला सकते हैं और virtual world का   धरातल पर काम हो, उसकी प्रेरणा बना सकते हैं | स्वच्छ-संकल्प से स्वच्छ-सिद्धि प्रतियोगिता, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा ये अभियान जिसमें आप निबंध की स्पर्धा है, लघु-फिल्म बनाने की स्पर्धा है, चित्रकला-प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है | इसमें आप विभिन्न भाषाओँ में निबंध लिख सकते हैं और उसमें कोई उम्र की मर्यादा नहीं है, कोई age limit नहीं है | आप short film बना सकते हैं, अपने mobile से बना सकते हैं | 2-3 मिनट की फिल्म बना सकते हैं जो स्वच्छता के लिए प्रेरणा दे | वो किसी भी language में हो सकती है, वो silent भी हो सकती है | ये जो प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे उसमें से जो best तीन लोग चुने जायेंगे, district level पर तीन होंगे, state level पर तीन होंगे उनको पुरस्कार दिया जाएगा | तो मैं हर किसी को निमंत्रण देता हूँ कि आइये, स्वच्छता के इस अभियान के इस रूप में भी आप जुड़ें |
    मैं फिर एक बार कहना चाहता हूँ कि इस बार 2 अक्टूबर गाँधी जयंती को ‘स्वच्छ 2 अक्टूबर’ मनाने का संकल्प करें और इसके लिए 15 सितम्बर से ही ‘स्वच्छता ही सेवा’ इस मंत्र को घर-घर पहुंचायें | स्वच्छता के लिए कोई-न-कोई कदम उठाएँ | स्वयं परिश्रम करके इसमें हिस्सेदार बनें | आप देखिए, गाँधी जयंती की ये 2 अक्टूबर कैसी चमकेगी | आप कल्पना कर सकते हैं 15 दिन के सफ़ाई के इस अभियान के बाद, ‘स्वच्छता ही सेवा’ के बाद, 2 अक्टूबर को जब हम गाँधी जयंती मनाएगें तो पूज्य बापू को श्रद्धांजलि देने का हमारे भीतर कितना एक पवित्र आनंद होगा | 
    मेरे प्यारे देशवासियो, मैं आज एक विशेष रूप से आप सब का ऋण स्वीकार करना चाहता हूँ | ह्रदय की गहराई से मैं आप का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ, इसलिए नहीं कि इतने लम्बे अरसे तक आप ‘मन की बात’ से जुड़े रहे | मैं इसलिए आभार व्यक्त करना चाहता हूँ, ऋण स्वीकार करना चाहता हूँ क्योंकि ‘मन की बात’ के इस कार्यक्रम के साथ देश के हर कोने से लाखों लोग जुड़ जाते हैं | सुनने वालों की संख्या तो करोड़ों में है, लेकिन लाखों लोग मुझे कभी पत्र लिखते हैं, कभी message देते हैं, कभी फ़ोन पे सन्देश आ जाता है, मेरे लिए एक बहुत बड़ा खज़ाना है | देश के जन-जन के मन को जानने के लिए ये मेरे लिए एक बहुत बड़ा अवसर बन गया है | आप जितना ‘मन की बात’ का इंतज़ार करते हैं उससे ज़्यादा मैं आपके संदेशों का इंतज़ार करता हूँ | मैं लालायित रहता हूँ क्योंकि आप की हर बात से मुझे कुछ सीखने को मिलता है | मैं जो कर रहा हूँ उसको कसौटी पर कसने का अवसर मिल जाता है | बहुत-सी बातों को नये तरीक़े से सोचने के लिए आपकी छोटी-छोटी बातें भी मुझे काम आती हैं और इसलिए मैं आपके इस योगदान के लिए आपका आभार व्यक्त करता हूँ, आपका ऋण स्वीकार करता हूँ और मेरे प्रयास रहता है कि ज़्यादा-से-ज़्यादा आपकी बातों को मैं स्वयं देखूँ, सुनूँ, पढूँ, समझूँ और ऐसी-ऐसी बातें आती हैं | अब देखिये, अब इस phone call से आप भी अपने आपको co-relate करते होंगे | आपको भी लगता होगा हाँ यार, आपने कभी ऐसी गलती की है | कभी-कभी तो कुछ चीज़ें हमारी आदत का ऐसा हिस्सा बन जाती हैं कि हमें लगता ही नहीं है कि हम ग़लत करते हैं |
‘‘प्रधानमंत्री जी, मैं पूना से अपर्णा बोल रही हूँ | मैं अपनी एक सहेली के बारे में बताना चाहती हूँ | वो हमेशा लोगों की मदद करने की कोशिश करती है लेकिन उसकी एक आदत देखकर मैं हैरान हो जाती हूँ | मैं एक बार उसके साथ शॉपिंग करने मॉल गयी थी | एक साड़ी पर उसने दो हज़ार रूपये बड़े आराम से खर्च कर दिए और पीज़ा पर 450/- रूपये, जबकि मॉल तक जाने के लिए जो ऑटो लिया था, उस ऑटो वाले से बहुत देर तक पाँच रूपये के लिए मोल-भाव करती रही | वापस लौटते हुए रास्ते में सब्जी खरीदी और हर सब्जी पर फिर से मोल-भाव करके 4-5 रूपये बचाये | मुझे बहुत बुरा लगता है | हम बड़ी-बड़ी जगह एक बार भी बिना पूछे बड़े-बड़े भुगतान कर देते हैं और हमारे मेहनतकश भाई-बहनों से थोड़े से रुपयों के लिए झगड़ा करते हैं | उन पर अविश्वास करते हैं | आप अपनी ‘मन की बात’ में इस बारे में ज़रूर बताएँ |”’’
अब ये phone call सुनने के बाद, मुझे पक्का विश्वास है कि आप चौंक भी गये होंगे, चौकन्ने भी हो गये होंगे और हो सकता है आगे से ऐसी गलती न करने का मन में तय भी कर लिये होंगे | क्या आपको नहीं लगता है कि जब हम, हमारे घर के आस-पास कोई सामान बेचने के लिए आता है, कोई फेरी लगाने वाला आता है, किसी छोटे दुकानदार से, सब्ज़ी बेचने वालों से हमारा संबंध आ जाता है, कभी ऑटो-रिक्शा वाले से संबंध आता है - जब भी हमारा किसी मेहनतकश व्यक्ति के साथ संबंध आता है तो हम उससे भाव का तोल-मोल करने लग जाते हैं, मोल-भाव करने लग जाते हैं - नहीं इतना नहीं, दो रूपया कम करो, पाँच रुपया कम करो | और हम ही लोग किसी बड़े restaurant में खाना खाने जाते हैं तो बिल में क्या लिखा है देखते भी नहीं हैं, धड़ाम से पैसे दे देते हैं | इतना ही नहीं showroom में साड़ी ख़रीदने जायें, कोई मोल-भाव नहीं करते हैं लेकिन किसी ग़रीब से अपना नाता आ जाये तो मोल-भाव किये बिना रहते नहीं हैं | ग़रीब के मन को क्या होता होगा, ये कभी आपने सोचा है ? उसके लिए सवाल दो रूपये - पांच रूपये का नहीं है | उसके ह्रदय को चोट पहुँचती है कि आपने वो ग़रीब है इसलिए उसकी ईमानदारी पर शक किया है | दो रूपया - पांच रूपया आपके जीवन में कोई फ़र्क नहीं पड़ता है लेकिन आपकी ये छोटी-सी आदत उसके मन को कितना गहरा धक्का लगाती होगी कभी ये सोचा है ? मैडम, मैं आप का आभारी हूँ आपने इतना ह्रदय को छूने वाला phone call करके एक message मुझे दिया | मुझे विश्वास है कि मेरे देशवासी भी ग़रीब के साथ ऐसा व्यवहार करने की आदत होगी तो ज़रुर छोड़ देंगे|
मेरे प्यारे नौजवान साथियो, 29 अगस्त को पूरा देश राष्ट्रीय खेल-दिवस के रूप में मनाता है | ये महान hockey player और हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी का जन्मदिवस है | हॉकी के लिए उनका योगदान अतुलनीय था | मैं इस बात का स्मरण इसलिए करा रहा हूँ कि मैं चाहता हूँ कि हमारे देश की नई पीढ़ी, खेल से जुड़े | खेल हमारे जीवन का हिस्सा बने | अगर हम दुनिया के युवा देश हैं तो हमारी ये तरुणाई खेल के मैदान में भी नज़र आनी चाहिए | Sports यानि physical fitness, mental alertness, personality enhancement मैं समझता हूँ कि इससे ज्यादा क्या चाहिए ? खेल एक प्रकार से दिलों के मेल की एक बहुत बड़ी जड़ी-बूटी है | हमारी देश की युवा पीढ़ी खेल जगत में आगे आए और आज computer के युग में तो मैं आगाह भी करना चाहूँगा कि playing field, play-station से ज्यादा महत्वपूर्ण है | computer पर FIFA खेलिये लेकिन बाहर मैदान में भी तो कभी football के साथ करतब करके दिखाइये | computer पर cricket खेलते होंगे लेकिन खुले मैदान में आसमान के नीचे cricket खेलने का आनंद कुछ और होता है | एक समय था जब परिवार के बच्चे बाहर जाते थे तो माँ पहले पूछती थी कि तुम कब वापिस आओगे | आज हालत ये हो गई है कि बच्चे घर में आते ही एक कोने में या तो cartoon film देखने में लग जाते हैं या तो mobile game पर चिपक जाते हैं और तब माँ को चिल्ला करके कहना पड़ता है - तू कब बाहर जाएगा | वक़्त-वक़्त की बात है, वो भी एक ज़माना था जब माँ बेटे को कहती थी कि तुम कब आओगे और आज ये हाल है कि माँ को कहना पड़ता है बेटा तुम बाहर कब जाओगे?
   नौजवान दोस्तो, खेल मंत्रालय ने खेल प्रतिभा की खोज और उन्हें निखारने के लिए एक Sports Talent Search Portal तैयार किया है, जहाँ पूरे देश से कोई भी बच्चा जिसने खेल के क्षेत्र में कुछ उपलब्द्धि हासिल की है, उनमें Talent हो - वो इस portal पर अपना Bio-Data या video upload कर सकता है | Selected emerging players को खेल मंत्रालय training देगा और मंत्रालय कल ही इस portal को launch करने वाला है | हमारे नौजवानों के लिए तो खुशी की खबर है कि भारत में 6 से 28 अक्टूबर तक FIFA Under 17 World Cup का आयोजन होने जा रहा है I दुनिया भर से 24 टीमें भारत को अपना घर बनाने जा रही हैं |
    आइये, विश्व से आने वाले हमारे नौजवान मेहमानों का, खेल के उत्सव के साथ स्वागत करें, खेल को enjoy करें, देश में एक माहौल बनाएं | जब मैं आज खेल की बात कर रहा हूँ तो मैं पिछले हफ्ते एक मेरे मन को बड़ी ही छू जाने वाली घटना घटी | देशवासियों के साथ share करना चाहता हूँ | मुझे बहुत ही छोटी आयु की कुछ बेटियों से मिलने का मौका मिला और उसमें से कुछ बेटियां तो हिमालय में पैदा हुई थी | समंदर से जिनका कभी नाता भी नहीं था | ऐसी हमारी देश की छ: बेटियां जो Navy  में काम करती हैं - उनका जज़्बा, उनका हौसला हम सब को प्रेरणा देने वाला है | ये छ: बेटियां, एक छोटी-सी boat लेकर करके INS Tarini (तारिणी) उसको लेकर कर के समुन्द्र पार करने के लिए निकल पड़ेगी | इस अभियान का नाम दिया गया है ‘नाविका सागर परिक्रमा’ और वे पूरे विश्व का भ्रमण करके महीनों के बाद, कई महीनों के बाद भारत लौटेगी | कभी एक साथ 40-40 दिन पानी में बिताएगी | कभी-कभी 30-30 दिन पानी में बिताएगी | समुन्द्र की लहरों के बीच साहस के साथ हमारी ये छ: बेटियां और ये विश्व में पहली घटना हो रही है | कौन हिंदुस्तानी होगा जिन्हें हमारी इन बेटियों पर नाज़ न हो ! मैं इन बेटियों के जज़्बे को सलाम करता हूँ और मैंने उनसे कहा है कि वो पूरे देश के साथ अपने अनुभवों को साझा करें | मैं भी NarendraModi App पर उनके अनुभवों के लिए एक अलग व्यवस्था करूँगा ताकि आप ज़रूर उसे पढ़ पाएं क्योंकि ये एक प्रकार से ये साहस कथा है, स्वानुभव की कथा होगी और मुझे खुशी होगी इन बेटियों की बातों को आप तक पहुंचाने में | मेरी इन बेटियों को बहुत-बहुत शुभकामना है, बहुत-बहुत आशीर्वाद है |
मेरे प्यारे देशवासियो, 5 सितम्बर को हम सब शिक्षक दिवस मनाते हैं | हमारे देश के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन जी का जन्मदिवस है | वे राष्ट्रपति थे लेकिन जीवन भर अपने आप को एक शिक्षक के रूप में ही वो प्रस्तुत करते थे | वो हमेशा शिक्षक के रूप में ही जीना पसंद करते थे | वे शिक्षा के प्रति समर्पित थे | एक अध्येता, एक राजनयिक, भारत के राष्ट्रपति लेकिन हर पल एक जीते-जागते शिक्षक | मैं उनको नमन करता हूँ |
महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था It is the supreme art of the teacher to awaken joy in creative expression and knowledge. अपने छात्रों में सृजनात्मक भाव और ज्ञान का आनंद जगाना ही एक शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण गुण है | इस बार जब हम शिक्षक दिवस मनाएँ | क्या हम सब मिलकर के एक संकल्प कर सकते हैं ? एक mission mode में एक अभियान चला सकते हैं ? Teach to Transform, Educate to Empower, Learn to Lead इस संकल्प के साथ इस बात को आगे बढ़ा सकते हैं क्या? हर किसी को 5 साल के लिए, किसी संकल्प से बांधिए, उसे सिद्ध करने का रास्ता दिखाइये और 5 साल में वो पाकर के रहे, जीवन में सफ़ल होने का आनंद पाये - ऐसा माहौल हमारे स्कूल, हमारे कॉलेज, हमारे शिक्षक, हमारे शिक्षा संस्थान ये कर सकते हैं और हमारे देश में जब हम transformation की बात करते हैं तो जैसे परिवार में माँ की याद आती है वैसे ही समाज में शिक्षक की याद आती है | transformation में शिक्षक की बहुत बड़ी भूमिका रहती है | हर शिक्षक के जीवन में कहीं-न-कहीं ऐसी घटनाएँ हैं कि जिसके सहज़ प्रयासों से किसी की ज़िन्दगी के transformation में सफ़लता मिली होगी | अगर हम सामूहिक प्रयास करेंगे तो राष्ट्र के transformation में हम बहुत बड़ी भूमिका अदा करेंगे | आइये teach to transform इस मंत्र को लेकर के चल पड़ें |
    ‘‘प्रणाम प्र”धानमंत्री जी | मेरा नाम है डॉक्टर अनन्या अवस्थी | मैं मुम्बई शहर की निवासी हूँ और Howard University के India Research Centre के लिये काम करती हूँ | एक researcher के तौर पर मेरी विशेष रूचि रही है वित्तीय समावेश में, जिसको हम financial inclusion इनसे related social schemes को लेकर और मेरा आपसे प्रश्न ये है कि 2014 में जो जनधन योजना launch हुई क्या आप कह सकते हैं, क्या आँकड़े ये दिखाते हैं कि आज तीन साल बाद भारतवर्ष financially  ज्यादा secure है या ज्यादा सशक्त है और क्या ये सशक्तिकरण और सुविधायें हमारी महिलाओं को, किसानों को, मजदूरों को गाँव और कस्बों तक भी प्राप्त हो पायी हैं | धन्यवाद |’’  
मेरे प्यारे देशवासियो, ‘प्रधानमंत्री जन-धन योजना’ financial inclusion, ये भारत में ही नहीं पूरे विश्व में आर्थिक जगत के पंडितों की चर्चा का विषय रहा है | 28 अगस्त, 2014 को मन में एक सपना ले करके इस अभियान को प्रारंभ किया था | कल 28 अगस्त को इस ‘प्रधानमंत्री जन-धन योजना’ के अभियान को तीन साल हो रहे हैं | 30 करोड़ नये परिवारों को इसके साथ जोड़ा है, bank account खोला है | दुनिया के कई देशों की आबादी से भी ज़्यादा ये नंबर है | आज मुझे एक बहुत बड़ा समाधान है कि तीन साल के भीतर-भीतर समाज के उस आख़िरी छोर पर बैठा हुआ मेरा ग़रीब भाई, देश की अर्थव्यवस्था के मूल-धारा का हिस्सा बना है, उसकी आदत बदली है, वो bank में आने-जाने लगा है, वो पैसों की बचत करने लगा है, वो पैसों की सुरक्षा महसूस कर रहा है | कभी पैसे हाथ में रहते हैं, ज़ेब में रहते हैं, घर में हैं तो फ़ालतू ख़र्च करने का मन कर जाता है | अब एक संयम का माहौल बना है और धीरे-धीरे उसको भी लगने लगा है कि पैसे कहीं बच्चों के काम आ जायेंगे | आने वाले दिनों में कोई अच्छा काम करना है तो पैसे काम आयेगें | इतना ही नहीं, जो ग़रीब अपने ज़ेब में RuPay Card देखता है तो अमीरों की बराबरी में अपने आपको पाता है कि उनके ज़ेब में भी credit card है, मेरी ज़ेब में भी RuPay Card है - वो एक सम्मान का भाव महसूस करता है | प्रधानमंत्री जन-धन योजना में हमारे ग़रीबों के द्वारा क़रीब 65 हज़ार करोड़ रूपया बैंकों में जमा हुआ है | एक प्रकार से ग़रीब की ये बचत है, ये आने वाले दिनों में उसकी ताक़त है | और प्रधानमंत्री जन-धन योजना के साथ जिसका account खुला, उसको insurance का भी लाभ मिला है | ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’, ‘प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना’ - एक रुपया, तीस रूपया बहुत मामूली सा premium आज वो ग़रीबों की ज़िन्दगी में एक नया विश्वास पैदा करता है | कई परिवारों में, एक रूपये के बीमे के कारण जब ग़रीब आदमी पर संकट आया, परिवार के मुखिया का जीवन अंत हो गया, कुछ ही दिनों में उसे 2 लाख रूपये मिल गए | ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’, ‘Start Up योजना’, ‘Stand Up योजना’ - दलित हो, आदिवासी हो, महिला हो, पढ़-लिख करके निकला हुआ नौज़वान हो, अपने पैरों पर खड़े होकर कुछ करने का इरादा वाले नौज़वान हो, करोड़ों-करोड़ों नौज़वानों को ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ से, बैंकों से बिना कोई गारन्टी पैसे मिले और वो स्वयं अपने पैरों पर खड़े हुए इतना ही नहीं, हर किसी ने एक-आध, एक-आध दो को रोज़गार देने का सफ़ल प्रयास भी किया है | पिछले दिनों बैंक के लोग मुझे मिले थे, जन-धन योजना के कारण, insurance के कारण, RuPay Card के कारण, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के कारण, सामान्य लोगों को कैसा लाभ हुआ है उसका उन्होंने सर्वे करवाया और बड़ी प्रेरक घटनायें मिली | आज इतना समय नहीं है लेकिन मैं ज़रूर ऐसी घटनाओं को bank के लोगों से कहूँगा कि वो MyGov.in पर उसको upload करें, लोग पढ़ें, लोगों को उससे प्रेरणा मिलेगी कि कोई योजना, व्यक्ति के जीवन में कैसे transformation लाता है, कैसे नयी ऊर्जा भरता है, कैसे नया विश्वास भरता है, इसके सैकड़ों उदाहरण मेरे सामने आये हैं | आप तक पहुँचाने का मैं पूरा प्रयास करूँगा और ऐसी प्रेरक घटना है कि media के लोग भी इसका पूरा लाभ उठा सकते हैं | वे भी ऐसे लोगों से interview करके नई पीढ़ी को नई प्रेरणा दे सकते हैं |
    मेरे प्यारे देशवासियो, फिर एक बार आपको मिच्छामी दुक्कड़म | बहुत-बहुत धन्यवाद |
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